HLV Limited ने चौथी तिमाही (Q4 FY26) के लिए ₹67.66 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि से 6.64% ज्यादा है। इसी तिमाही में कंपनी ने ₹8.60 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया है, जिससे प्रति शेयर आय (EPS) ₹0.13 रही।
हालांकि, पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) के नतीजे चिंताजनक हैं। इस अवधि में कंपनी का कुल रेवेन्यू 1.89% घटकर ₹214.27 करोड़ पर आ गया। इससे भी बुरी खबर यह है कि नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹2,613 लाख (₹26.13 करोड़) से 92.04% गिरकर सिर्फ ₹208 लाख (₹2.08 करोड़) रह गया। सालाना EPS महज ₹0.03 रही। इस साल ₹303 लाख का एक एक्सेप्शनल लॉस भी दर्ज किया गया, जिसका मुख्य कारण नए लेबर कोड और इस्तेमाल न हुए GST इनपुट क्रेडिट थे। सकारात्मक बात यह है कि कंपनी ने कुल उधार को मार्च 2025 में ₹1,819 लाख से घटाकर मार्च 2026 तक ₹1,100 लाख कर लिया है।
AAI विवाद: कंपनी पर ₹982 करोड़ का खतरा
HLV Limited की मुश्किलों की जड़ एयरपोट्र्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के साथ एक बड़ा विवाद है। कंपनी ₹98,257 लाख (यानी ₹982.57 करोड़) के दावों का सामना कर रही है, जिसमें ₹17,552 लाख लीज रेंट और ₹80,705 लाख रॉयल्टी/गारंटी फीस शामिल हैं। यह रकम 31 मार्च, 2026 तक कंपनी की ₹471.03 करोड़ की नेट वर्थ से कहीं ज्यादा है, जो कंपनी के अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करती है।
इस गंभीर वित्तीय दबाव के कारण कंपनी के ऑडिटर ने वित्तीय स्टेटमेंट को 'गोइंग कंसर्न' (यानी चालू कंपनी) के आधार पर तैयार किया है। यह मान्यता इन AAI विवादों के सफल और अनुकूल समाधान पर निर्भर करती है, जो कंपनी की भविष्य की व्यवहार्यता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
HLV Limited, जो पहले एक निर्माता थी, अब एयरपोर्ट रिटेल मैनेजमेंट और लॉजिस्टिक्स सेवाओं में विस्तार कर चुकी है। एयरपोट्र्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के साथ इसके जुड़ाव में लंबी कानूनी लड़ाई देखी गई है। हालिया रिपोर्टों से पता चलता है कि HLV Ltd पर एयरपोर्ट रियायतों के भुगतान में डिफॉल्ट का आरोप है, जिसके कारण AAI अनुबंध समाप्त करने की मांग कर रहा है। HLV Ltd ने इन कार्रवाइयों को गलत बताते हुए संपत्ति पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया है।
मौजूदा आंकड़े इन विवादित देनदारियों के बढ़े हुए पैमाने को दर्शाते हैं, जो सीधे कंपनी की वित्तीय सॉल्वेंसी को खतरे में डाल रहे हैं। ऑडिटर की 'गोइंग कंसर्न' स्थिति पर योग्यता का उल्लेख सीधे इन अनसुलझे कानूनी झगड़ों और उन पर पड़ने वाले भारी वित्तीय दबाव का नतीजा है। इसका मतलब है कि अगर AAI विवाद HLV Ltd के खिलाफ जाता है, तो कंपनी की नेट वर्थ पूरी तरह खत्म हो सकती है। कंपनी को संभावित प्रतिकूल परिणामों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण रीकैपिटलाइजेशन या वित्तीय पुनर्गठन की आवश्यकता हो सकती है।
