यह फैसला 6 अप्रैल 2026 को सुनाया गया, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिस मध्यस्थ (arbitrator) की नियुक्ति की गई थी, वह शुरू से ही यानी 'void ab initio' अमान्य थी। इस गंभीर खामी के कारण, 26 सितंबर 2022 को Travel Food Services को दिया गया मध्यस्थता अवॉर्ड भी कानूनी तौर पर शून्य (nullity) माना गया।
इसके चलते, कंपनी की ओर से अप्रैल 2024 में इस अवॉर्ड को लागू (enforce) कराने के लिए दायर की गई याचिका को भी अब 'infructuous' यानी निष्फल करार देते हुए खारिज कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि कंपनी अब इस अवॉर्ड के ज़रिए कोई भी वित्तीय वसूली (financial recovery) नहीं कर सकेगी।
यह फैसला Travel Food Services के लिए एक बड़ा कानूनी और वित्तीय झटका है। मध्यस्थता अवॉर्ड का रद्द होना कंपनी के लिए एक निश्चित समाधान (definitive resolution) की उम्मीदों को तोड़ता है, खासकर जब इसमें बड़ी वित्तीय राशि (substantial financial claims) शामिल हो सकती थी। इस अवॉर्ड के शून्य होने से कंपनी को इसके संभावित लाभों से वंचित रहना पड़ेगा।
Travel Food Services Ltd भारतीय ट्रैवल रिटेल (travel retail) और फूड एंड बेवरेज (F&B) सेक्टर की एक जानी-मानी कंपनी है। यह भारत, मलेशिया और हांगकांग के एयरपोर्ट्स और ट्रैवल हब में क्विक सर्विस रेस्टोरेंट्स (QSRs) और लाउंज चलाती है।
इस फैसले के बाद, कंपनी को मिले मध्यस्थता अवॉर्ड का लाभ नहीं मिलेगा। अवॉर्ड को लागू कराने की कंपनी की याचिका अब व्यर्थ हो गई है। Travel Food Services को मूल विवाद (original dispute) से संबंधित अपनी संभावित वित्तीय वसूली का फिर से आकलन करना होगा और अपने हितों की रक्षा के लिए अगले कदमों पर विचार करना होगा।
मध्यस्थ की नियुक्ति में प्रक्रियात्मक त्रुटि (procedural defect) के कारण अवॉर्ड का पूरी तरह से शून्य होना, मूल विवाद को लेकर भी काफी कानूनी अनिश्चितता (legal uncertainty) पैदा करता है। अब देखना यह होगा कि कंपनी इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया देती है और आगे क्या कदम उठाती है।