CARE Ratings ने उठाई सवाल
CARE Ratings, जो कि इस IPO के लिए मॉनिटरिंग एजेंसी है, की एक रिपोर्ट ने DSM Fresh Foods Ltd के ₹59.06 करोड़ जुटाने वाले इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के फंड के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी ने फंड के इस्तेमाल में कई बार अपनी तय योजनाओं से हटकर काम किया है।
फंड के इस्तेमाल में क्या है गड़बड़ी?
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने IPO से जुड़े खर्चों पर लगने वाले गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) का भुगतान भी IPO की रकम से किया है। यह कंपनी के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में किए गए वादे के खिलाफ है, जिसमें कहा गया था कि लागू टैक्स को छोड़कर बाकी खर्चों का भुगतान किया जाएगा।
अनुमान से ज़्यादा खर्च और बदले रास्ते
इसके अलावा, 'वर्किंग कैपिटल' (Working Capital) के लिए फंड का इस्तेमाल अनुमान से कहीं ज़्यादा हुआ है। वित्तीय वर्ष 2026 के लिए जहां ₹12.50 करोड़ का प्लान था, वहीं ₹24.83 करोड़ खर्च कर दिए गए। 'जनरल कॉर्पोरेट पर्पज' (General Corporate Purposes) के तहत भी ₹1.09 करोड़ के अनुमान के मुकाबले ₹2.12 करोड़ खर्च हुए।
'मार्केटिंग एक्सपेंडिचर' (Marketing Expenditure) को भी कंपनी ने तय किए गए 'HT Media Platform' के बजाय Google Ads और Facebook Ads जैसे ऑनलाइन माध्यमों से किया है, जो कि DRHP में बताई गई रणनीति से अलग है।
क्या है अनयूटिलाइज्ड फंड?
इन खर्चों के बावजूद, रिपोर्ट बताती है कि 31 मार्च 2026 तक ₹18.58 करोड़ का IPO फंड अभी भी इस्तेमाल नहीं किया गया है।
गवर्नेंस पर भी सवाल
इन सभी बड़े बदलावों के लिए कंपनी ने शेयरहोल्डर्स (Shareholders) से कोई विशेष मंजूरी नहीं ली है, जिसे कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) के नजरिए से एक चूक माना जा रहा है। फंड के इस तरह के शुरुआती और अनुमान से ज़्यादा इस्तेमाल से कंपनी की भविष्य की वित्तीय लचीलेपन (financial flexibility) पर भी असर पड़ सकता है।
अब निवेशकों को कंपनी से इस बात का स्पष्टीकरण चाहिए कि भविष्य के खर्चों को कैसे फंड किया जाएगा और इन गड़बड़ियों को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं। SEBI या स्टॉक एक्सचेंजों (Stock Exchanges) से कोई भी अपडेट इन पर करीबी नजर रखेगा।