कंपनी ने 23 मार्च, 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि उसे इनकम टैक्स विभाग से एसेसमेंट ईयर 2023-24 के लिए एक असेसमेंट ऑर्डर मिला है।
इस ऑर्डर के तहत, कंपनी पर ₹18,937.08 लाख यानी ₹189.37 करोड़ का इनकम टैक्स बकाया दिखाया गया है।
कंपनी का कहना है कि वह इस ऑर्डर को मानने वाली नहीं है और इसके खिलाफ अपील दायर करेगी।
क्यों है यह बड़ी बात?
अगर यह टैक्स डिमांड अंतिम रूप से कंपनी पर थोपी जाती है, तो यह उसके मुनाफे (Profitability) और वित्तीय भंडार (Financial Reserves) पर गंभीर असर डाल सकती है।
फिलहाल, कंपनी इसे अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में एक 'कंटिंजेंट लायबिलिटी' (Contingent Liability) के तौर पर दर्ज करेगी। इसका मतलब है कि यह एक संभावित भविष्य का दायित्व है, जो अभी तय नहीं है।
अब आगे क्या होगा?
इस अपील प्रक्रिया के लिए कंपनी को कानूनी और प्रशासनिक खर्चों से गुजरना पड़ेगा।
निवेशकों की नजरें अब कंपनी की अपील पर और उसके नतीजों पर टिकी रहेंगी।
मुख्य जोखिम (Risks) क्या हैं?
सबसे बड़ा जोखिम यह है कि कहीं अपील का नतीजा कंपनी के खिलाफ न आए, जिससे उसे ₹189.37 करोड़ का भुगतान करना पड़ सकता है।
अगर ऐसा होता है, तो यह कंपनी के नेट प्रॉफिट (Net Profit) और बांटे जाने वाले रिजर्व्स (Distributable Reserves) को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।
आगे क्या देखना होगा?
कंपनी की अपील दायर करने की प्रक्रिया और उसकी समय-सीमा, खासकर नेशनल फेसलेस अपील सेंटर (NFAC) में।
इनकम टैक्स विभाग से मिलने वाले अगले अपडेट्स या अपील के अंतिम नतीजे का इंतजार रहेगा।
इस कंटिंजेंट लायबिलिटी के असर के बीच कंपनी के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर भी नजरें रहेंगी।
