ट्रेडिंग विंडो का क्या है मतलब?
सेबी (SEBI) के नियमों के मुताबिक, जब कोई कंपनी अपने तिमाही या सालाना नतीजे पेश करने वाली होती है, तो वह कुछ समय के लिए 'ट्रेडिंग विंडो' बंद कर देती है। इस दौरान कंपनी के डायरेक्टर्स, बड़े अधिकारी और उनके करीबी रिश्तेदार कंपनी के शेयर नहीं खरीद या बेच सकते। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि किसी को भी कंपनी की गोपनीय जानकारी (Unpublished Price Sensitive Information - UPSI) का फायदा उठाकर शेयर बाजार में गैर-कानूनी तरीके से ट्रेडिंग करने का मौका न मिले।
न्यू इंडिया एश्योरेंस ने अपनी बोर्ड मीटिंग 11 मई, 2026 को तय की है, जहां 31 मार्च, 2026 को खत्म हो रहे फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के नतीजों पर मुहर लगेगी। इसी वजह से, कंपनी ने अपनी ट्रेडिंग विंडो को 13 मई, 2026 तक बढ़ा दिया है, यानी इनसाइडर ट्रेडिंग (Insider Trading) पर यह रोक अगले महीने की 13 तारीख तक लागू रहेगी।
कंपनी के सामने क्या हैं चुनौतियां?
न्यू इंडिया एश्योरेंस भारत की सबसे बड़ी सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनी है। कंपनी के सामने फिलहाल कुछ टैक्स से जुड़ी बड़ी चुनौतियां हैं। असेसमेंट ईयर 2023-24 के लिए कंपनी पर ₹189.37 करोड़ का टैक्स बकाया है। इसके अलावा, जीएसटी (GST) की कथित कमी के चलते कंपनी पर ₹23.79 अरब (लगभग 268 मिलियन डॉलर) का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया गया है। हालांकि, कंपनी इन दोनों मामलों को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
जनवरी 2020 में भी कंपनी सेबी (SEBI) के साथ एक्सिस बैंक (Axis Bank) के शेयरों में इनसाइडर ट्रेडिंग के एक मामले को सुलझा चुकी है। दिसंबर 2024 की एक AM Best रिपोर्ट में भी कंपनी की पुरानी वित्तीय रिपोर्टों में कुछ कमियों का जिक्र किया गया था, जिसका कारण इंटरनल कंट्रोल (Internal Control) से जुड़ी दिक्कतें बताई गई थीं।
यह एक सामान्य प्रक्रिया है
भारतीय जनरल इंश्योरेंस सेक्टर में यह एक आम बात है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस (ICICI Lombard General Insurance), जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (GIC of India) और लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) जैसी कंपनियां भी नतीजों से पहले अपनी ट्रेडिंग विंडो बंद रखती हैं।
निवेशक अब 11 मई, 2026 को होने वाली बोर्ड मीटिंग का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, ताकि कंपनी के 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के नतीजे पता चल सकें। साथ ही, कंपनी टैक्स से जुड़े मामलों में कहां तक आगे बढ़ती है, इस पर भी सबकी नजरें रहेंगी।
