इनकम टैक्स विभाग का ₹10,331 करोड़ का नोटिस
LIC को मिले इस नोटिस के मुताबिक, उन पर ₹8,576.82 करोड़ का इनकम टैक्स और ₹1,754.45 करोड़ का ब्याज बनता है। यह डिमांड फाइनेंशियल ईयर 2023-24 (FY24) के लिए है। कंपनी ने कन्फर्म किया है कि उन्हें यह ऑर्डर 27 मार्च, 2026 को मिला है, और वे इसके खिलाफ अपील करने की योजना बना रहे हैं।
LIC की ओर से क्या कहा गया?
LIC ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि इस भारी-भरकम टैक्स डिमांड का कंपनी के रोजाना के कामकाज पर कोई खास 'मटेरियल इम्पैक्ट' (material impact) नहीं पड़ेगा। कंपनी अपनी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए इस मामले में आगे बढ़ेगी और कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (अपील्स) के पास अपनी अपील फाइल करेगी।
क्यों है यह विवाद?
इंश्योरेंस सेक्टर में, खासकर लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए, अकाउंटिंग प्रैक्टिस (accounting practices) को लेकर टैक्स अथॉरिटीज (tax authorities) और कंपनियों के बीच अक्सर अलग-अलग व्याख्याएं (interpretations) होती हैं। इस तरह की मांगें उसी का संकेत देती हैं, जो इस सेक्टर में एक संभावित जोखिम बना रहता है।
LIC का पिछला टैक्स रिकॉर्ड
यह पहली बार नहीं है जब LIC को इतने बड़े टैक्स नोटिस का सामना करना पड़ा है। इससे पहले भी, कंपनी ने ₹4,993 करोड़ और ₹7,099 करोड़ से अधिक की टैक्स डिमांड के खिलाफ भी कानूनी लड़ाई लड़ी है। ये मामले इंटेरिम बोनस (interim bonuses), फंड लॉस (fund losses) और नेगेटिव रिजर्व (negative reserves) जैसे मसलों से जुड़े थे। इसके अलावा, SEBI ने भी कंपनी पर कुछ नियमों के उल्लंघन के लिए पेनल्टी (penalty) लगाई थी।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
LIC भारत की सबसे बड़ी सरकारी लाइफ इंश्योरर है और इसका मार्केट शेयर 57-60% से अधिक है। इस तरह की टैक्स डिमांड, भले ही LIC इसका तुरंत प्रभाव न होने का दावा करे, निवेशकों के लिए रेगुलेटरी (regulatory) और टैक्स कंप्लायंस (tax compliance) से जुड़े जोखिमों की ओर इशारा करती हैं।
