LIC ने SEBI के डेमेट नियमों पर फाइल की रिपोर्ट
लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए SEBI के डेपोजिटरी नियमों के तहत अपनी अनिवार्य कंप्लायंस रिपोर्ट जमा कर दी है। यह रिपोर्ट सिक्योरिटीज के डेमेटरलाइजेशन (dematerialization) और री-मेटेरियलाइजेशन (rematerialization) की प्रक्रिया को सुनिश्चित करती है।
SEBI डेमेट कंप्लायंस फाइलिंग का विवरण
LIC ने SEBI की डेपोजिटरी रेगुलेशन्स के तहत अपना सर्टिफिकेट फाइल किया है, जो 31 मार्च 2026 को खत्म हुई तिमाही को कवर करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, LIC के रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट (RTA) KFin Technologies Limited ने इस अवधि के दौरान सिक्योरिटीज के डेमेटरलाइजेशन को प्रोसेस किया है। KFin Technologies ने 2 अप्रैल 2026 को अपना सर्टिफिकेट जारी किया था, जिसे LIC ने 7 अप्रैल 2026 को एक्सचेंजों में जमा कराकर रेगुलेटरी समय-सीमा का पालन किया।
इस फाइलिंग का महत्व
यह SEBI द्वारा सभी लिस्टेड कंपनियों के लिए एक स्टैंडर्ड कंप्लायंस रिक्वायरमेंट है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शेयरधारिता के रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक रूप से सटीक रखे जाएं, जिससे पारदर्शिता बढ़े और निवेशकों के लिए ट्रेडिंग आसान हो। इन नियमों का पालन करने से मार्केट इंटीग्रिटी बनी रहती है और कॉर्पोरेट एक्शन्स के स्थापित दिशानिर्देशों के अनुसार प्रबंधित होने की पुष्टि करके निवेशकों का विश्वास बढ़ता है।
LIC की रेगुलेटरी पृष्ठभूमि
1956 में स्थापित LIC, भारत की सबसे बड़ी पब्लिक सेक्टर इंश्योरर है। मई 2022 में अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के बाद से, LIC, BSE और NSE पर एक पब्लिकली ट्रेडेड कंपनी बन गई है। इस स्थिति के कारण LIC को SEBI जैसी रेगुलेटरी बॉडीज के नियमों का लगातार पालन करना पड़ता है, जिसमें नियमित कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करना भी शामिल है।