महाराष्ट्र टैक्स अथॉरिटी का फैसला
ICICI Prudential Life Insurance ने 30 मार्च 2026 को बताया कि उसे फाइनेंशियल ईयर 2019 के लिए एक टैक्स अपील ऑर्डर प्राप्त हुआ है। महाराष्ट्र के टैक्स अधिकारियों द्वारा जारी इस फैसले में कंपनी की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार किया गया, लेकिन कुल ₹2,407.78 करोड़ की टैक्स मांग को बरकरार रखा गया।
इस मांग में ₹979.08 करोड़ गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के तौर पर, ₹1,330.67 करोड़ इंटरेस्ट (ब्याज) के रूप में, और ₹98.02 करोड़ पेनल्टी (जुर्माना) के तौर पर शामिल हैं।
कंपनी का रुख और आगे की रणनीति
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि 'इस स्तर पर कोई प्रभाव नहीं' है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी अपनी कानूनी प्रक्रियाओं और मौजूदा प्रावधानों के जरिए इस मांग से निपटने को लेकर आश्वस्त है। शेयरधारकों की निगाहें अब कंपनी द्वारा आगे की अपील दायर करने से जुड़े कानूनी खर्चों पर रहेंगी।
पिछला कर विवाद
यह पहली बार नहीं है जब ICICI Prudential Life Insurance को कर संबंधी नोटिस का सामना करना पड़ा है। अगस्त 2023 में, कंपनी ने ₹7.17 करोड़ का GST नोटिस मिलने की जानकारी दी थी, जो फाइनेंशियल ईयर 2022 के लिए उसकी पैरेंट कंपनी, ICICI Bank को दी गई सेवाओं से संबंधित था। भारत में लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों को अक्सर जटिल नियमों और उत्पाद संरचनाओं के कारण विभिन्न कर आकलन की समीक्षाओं का सामना करना पड़ता है।
इंडस्ट्री का परिदृश्य
इस तरह के टैक्स संबंधी मामले भारतीय वित्तीय संस्थानों के लिए आम हैं। HDFC Life, SBI Life, और Bajaj Allianz Life जैसी अन्य बड़ी लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां भी नियमित रूप से नियामक जांच के दायरे में आती हैं, और कर मांगों का पैमाना उनकी विशिष्ट परिचालन और समीक्षा अवधि पर निर्भर करता है।
संभावित जोखिम
मुख्य जोखिम यह है कि यदि आगामी अपीलें विफल रहीं तो ₹2,407.78 करोड़ की यह टैक्स मांग एक निश्चित वित्तीय देनदारी बन सकती है। इसके अलावा, इन अपीलों से जुड़े कानूनी कार्रवाई और प्रशासनिक प्रयासों की लागत भी खर्चों में बढ़ोतरी कर सकती है।
