HDFC Life Insurance ने अपना वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) 7% की इंडिविजुअल एनुअल प्रीमियम इक्विवेलेंट (APE) ग्रोथ के साथ पूरा किया है। यह आंकड़ा कंपनी की आंतरिक उम्मीदों से थोड़ा कम रहा। कंपनी के अनुसार, इस प्रदर्शन पर ग्लोबल अनिश्चितता और रेगुलेटरी बदलावों का असर पड़ा है। पूरे साल के लिए वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस (VNB) में 2% का इजाफा हुआ और यह ₹4,034 करोड़ पर पहुँचा।
नए बिजनेस मार्जिन पर बड़ा झटका लगा है, जो पिछले साल के 25.6% से घटकर 24.2% हो गए हैं। मार्जिन में इस गिरावट की मुख्य वजह गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) का 130 बेसिस प्वाइंट का असर और नए सरेंडर वैल्यू नियम रहे। इसके अलावा, चौथी तिमाही (Q4) में ग्रोथ थोड़ी धीमी रहने के कारण फिक्स्ड कॉस्ट एब्जॉर्प्शन का 90 बेसिस प्वाइंट का प्रभाव भी मार्जिन पर पड़ा है।
हालांकि, कंपनी के लिए कुछ सकारात्मक संकेत भी हैं। रिटेल प्रोटेक्शन सेगमेंट में 43% की दमदार ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ देखी गई है। एजेंसी चैनल ने भी इंडस्ट्री को पछाड़ते हुए बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जिसे पिछले 30 महीनों में 250 से ज्यादा नई ब्रांचेज जोड़ने से और मजबूती मिली है।
अपनी वित्तीय स्थिति को और मजबूत करने के लिए, HDFC Life के बोर्ड ने HDFC Bank से ₹1,000 करोड़ जुटाने की मंजूरी दी है। इस पूंजी से कंपनी के सॉल्वेंसी रेशियो (Solvency Ratio) में लगभग 900 बेसिस प्वाइंट का सुधार होने की उम्मीद है, जो वर्तमान में 177% पर है।
मैनेजमेंट का कहना है कि उनका अल्पकालिक लक्ष्य इंडस्ट्री ग्रोथ से आगे रहना और VNB को बढ़ाना है, भले ही इसके लिए मार्जिन पर थोड़ा समझौता करना पड़े। कंपनी को उम्मीद है कि GST का प्रभाव कम होने और बिजनेस ग्रोथ के स्थिर होने पर FY27 की पहली छमाही तक मार्जिन धीरे-धीरे सुधरकर 25% से ऊपर पहुँच जाएंगे।
कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ प्रतिस्पर्धी 'irrational pricing' कर रहे हैं, लेकिन HDFC Life अपनी प्राइसिंग डिसिप्लिन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। 13वें महीने की पर्सिस्टेंसी (13th-month persistency) में 200 बेसिस प्वाइंट की कमी और ग्लोबल भू-राजनीतिक तनाव जैसे कुछ अन्य फैक्टर भी हैं जिन पर निवेशकों को नजर रखनी होगी।
