क्या है पूरा मामला?
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने GIC Re को भेजे नोटिस में कई बड़े एडजस्टमेंट का जिक्र किया है। इनमें ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े एडजस्टमेंट शामिल हैं, जिनकी रकम ₹88.84 करोड़ बताई गई है। इसके अलावा, ₹2.70 करोड़ के खर्चों को डिसअलाउ (disallow) किया गया है, वहीं बिना रजिस्टर्ड GST एंटिटीज को किए गए भुगतान पर ₹565.01 करोड़ की मांग की गई है। निवेश प्रीमियम के अमोर्टाइजेशन (amortization) पर ₹52.81 करोड़ और संदिग्ध कर्जों के प्रोविजन (provision) पर ₹329.48 करोड़ का एडजस्टमेंट भी नोटिस का हिस्सा है।
GIC Re का जवाब और आगे की रणनीति
कंपनी ने साफ कर दिया है कि वे इस टैक्स डिमांड को स्वीकार नहीं करेंगे। GIC Re नेशनल फेसलेस अपील सेंटर (NFAC) में अपील दायर करने की योजना बना रही है। अगले 30 दिनों के भीतर कंपनी डायरेक्ट टैक्स एक्सपर्ट्स से सलाह भी लेगी ताकि अपील की रणनीति तैयार की जा सके। GIC Re ने यह भी कन्फर्म किया है कि इस नोटिस का कंपनी पर कोई तत्काल फाइनेंशियल इम्पैक्ट (financial impact) नहीं पड़ेगा।
इंडस्ट्री में बढ़ रही टैक्स की मुश्किलें
GIC Re अकेली ऐसी कंपनी नहीं है जो इस तरह के टैक्स नोटिस का सामना कर रही है। हाल के दिनों में अन्य जनरल इंश्योरेंस कंपनियों पर भी टैक्स का शिकंजा कसा है। New India Assurance को पहले ₹2,298 करोड़ और फिर ₹2,379.13 करोड़ के GST डिमांड नोटिस मिले थे। इसी तरह, Oriental Insurance और United India Insurance जैसी कंपनियों को भी टैक्स डिस्प्यूट का सामना करना पड़ा है। इससे यह साफ है कि इंश्योरेंस सेक्टर में टैक्स अथॉरिटीज की निगरानी बढ़ी है।