Welspun Enterprises: सब्सिडियरी को ₹33.34 करोड़ का इनकम टैक्स नोटिस! कंपनी ने फाइल की अपील

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Welspun Enterprises: सब्सिडियरी को ₹33.34 करोड़ का इनकम टैक्स नोटिस! कंपनी ने फाइल की अपील
Overview

Welspun Enterprises की सब्सिडियरी Welspun Aunta-Simaria Project Private Limited को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से **₹33.34 करोड़** का इनकम टैक्स नोटिस मिला है। यह नोटिस फाइनेंशियल ईयर 2023-24 (Assessment Year: 2024-25) के लिए जारी किया गया है। कंपनी इस नोटिस को चुनौती देगी और अपील फाइल करेगी, साथ ही कंपनी का कहना है कि इससे कोई खास फाइनेंशियल या ऑपरेशनल असर नहीं पड़ेगा।

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Welspun Enterprises की एक महत्वपूर्ण सब्सिडियरी, Welspun Aunta-Simaria Project Private Limited, को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एक बड़ा झटका दिया है। कंपनी को फाइनेंशियल ईयर 2023-24 के लिए ₹33.34 करोड़ का इनकम टैक्स डिमांड नोटिस मिला है। कंपनी के लिए राहत की बात यह है कि वे इस नोटिस को विवादित मानते हैं और इसके खिलाफ अपील फाइल करने की योजना बना रहे हैं। कंपनी का भरोसा है कि इस मामले का उनके फाइनेंशियल या ऑपरेशनल कामकाज पर कोई बड़ा या मटेरियल असर नहीं पड़ेगा।

यह सब्सिडियरी बिहार में एक बड़ा हाईवे प्रोजेक्ट डेवलप कर रही है, जिसे नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से भी फंड मिल रहा है। इस टैक्स डिमांड के बीच, यह जान लेना ज़रूरी है कि कंपनी विवादों को सुलझाने के लिए अक्सर अपीलेट प्रोसेस का सहारा लेती रही है। उदाहरण के लिए, जुलाई 2017 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की रेड के बाद भी कंपनी ने कहा था कि कोई खास बात सामने नहीं आई। वहीं, अक्टूबर 2025 में, Welspun Enterprises को तमिलनाडु अथॉरिटीज से फाइनेंशियल ईयर 2018-19 के लिए ₹18 करोड़ का गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) डिमांड मिला था, जिसमें टैक्स और पेनल्टी शामिल थी। उस नोटिस के खिलाफ भी कंपनी ने अपील करने की योजना बनाई थी।

कंपनी के लेटेस्ट स्टेटमेंट के मुताबिक, इस इनकम टैक्स नोटिस का Welspun Enterprises के फाइनेंशियल, ऑपरेशनल या अन्य बिजनेस एक्टिविटीज पर कोई मटेरियल असर नहीं होगा। कंपनी का अगला कदम संबंधित ट्रिब्यूनल के सामने टैक्स डिमांड के खिलाफ औपचारिक अपील फाइल करना है। इस डिस्प्यूट और अपील की वजह से सब्सिडियरी से तुरंत किसी भी तरह के फाइनेंशियल आउटफ्लो की उम्मीद नहीं है।

हालांकि, कंपनी के कॉन्फिडेंस के बावजूद, अपील का नतीजा एक बड़ा रिस्क हो सकता है। अगर अपील सफल नहीं होती है, तो सब्सिडियरी ₹33.34 करोड़ की डिमांड के साथ-साथ इंटरेस्ट और पेनल्टी भरने के लिए लायबल हो सकती है। किसी एडवर्स रूलिंग से कंपनी की रेप्युटेशन पर भी असर पड़ सकता है, हालांकि कंपनी का इतिहास ऐसे सिचुएशन को मैनेज करने का रहा है। लंबी कानूनी कार्यवाही सब्सिडियरी के प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और फाइनेंशियल हेल्थ को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकती है।

Welspun Enterprises इंफ्रास्ट्रक्चर और EPC सेक्टर में काम करती है, जहां Larsen & Toubro (L&T), टाटा प्रोजेक्ट्स और Hindustan Construction Company (HCC) जैसे बड़े खिलाड़ी भी मौजूद हैं। जबकि ये बड़ी फर्म्स कॉम्प्लेक्स रेगुलेशंस से गुजरती हैं, प्रोजेक्ट-स्पेसिफिक एंटिटीज के लिए इस तरह के टैक्स डिस्प्यूट्स अधिक सार्वजनिक रूप से सामने आ सकते हैं। Welspun Aunta-Simaria Project Private Limited जैसी सब्सिडियरी SPV (स्पेशल पर्पज व्हीकल) के लिए टैक्स असेसमेंट उसके विशिष्ट प्रोजेक्ट एक्टिविटीज के हिसाब से अधिक कस्टमाइज्ड हो सकते हैं।

अगर बात करें कंपनी के की-फाइनेंशियल्स की, तो Welspun Aunta-Simaria Project Private Limited का रेवेन्यू ₹342 करोड़ (FY25) है। वहीं, Welspun Enterprises का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹28,723 मिलियन और नेट प्रॉफिट ₹3,488 मिलियन (FY24) रहा है।

अब यह देखना अहम होगा कि कंपनी कितनी जल्दी अपनी अपील फाइल करती है और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से इस मामले पर आगे क्या कम्युनिकेशन आता है। कंपनी के लगातार इस बात पर बने रहने की उम्मीद है कि ऑपरेशन और फाइनेंशियल पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.