Welspun Enterprises ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया है कि दिलीपकुमार लखी और उनसे जुड़े अन्य पक्षों की कंपनी में हिस्सेदारी अब 6.9670% रह गई है। यह हिस्सेदारी मई 2020 में 8.7491% थी। इस दौरान, उन्होंने 96,43,378 शेयर रखे हैं, जबकि पहले उनके पास 1,21,10,011 शेयर थे। यह कुल इक्विटी शेयर कैपिटल (Equity Share Capital) के 1.77% से ज्यादा की कटौती है।
निवेशक की बदली रणनीति?
दिलीपकुमार लखी, जो 2020-2021 के आसपास कंपनी में एक बड़ी हिस्सेदारी लेकर आए थे ताकि कंपनी को उबार सकें, उनका यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। यह बदलाव निवेशक के लॉन्ग-टर्म व्यू (Long-term View) या पोर्टफोलियो की रणनीति में बदलाव का संकेत हो सकता है।
कंपनी की स्थिति
Welspun Enterprises ने हाल के वर्षों में अपने इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस पर फोकस करते हुए वित्तीय रिकवरी के संकेत दिखाए हैं। कंपनी का रेवेन्यू बढ़ा है और डेट (Debt) भी कम हुआ है।
बाजार पर असर
इस बड़े निवेशक की हिस्सेदारी में कमी से Welspun Enterprises पर बाजार की नजरें और तेज हो सकती हैं। निवेशक कंपनी की भविष्य की रणनीतियों और पूंजी आवंटन पर बारीकी से नजर रखेंगे।
इंडस्ट्री और वित्तीय आंकड़े
Welspun Enterprises इंफ्रास्ट्रक्चर और EPC सेक्टर में काम करती है, जहां Larsen & Toubro (L&T), PNC Infratech Ltd और KNR Constructions Ltd जैसी कंपनियां भी प्रमुख हैं।
फाइनेंशियल ईयर 2023 (FY23) में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू लगभग ₹2,700 करोड़ था, जबकि FY24 के लिए यह ₹3,200 करोड़ रहने का अनुमान है। FY23 में नेट प्रॉफिट ₹100 करोड़ था, जो FY24 में बढ़कर ₹140 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। कंपनी का कंसोलिडेटेड डेट टू इक्विटी रेशियो (Debt to Equity Ratio) FY23 में 0.45 था।