Q3 FY26 में कैसी रही कंपनी की परफॉरमेंस?
Vikas Lifecare Ltd ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही और नौ महीनों के अपने वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। कंसोलिडेटेड (Consolidated) आधार पर, कंपनी को ₹29.28 करोड़ का भारी शुद्ध घाटा हुआ, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह घाटा केवल ₹6.86 करोड़ था। कंसोलिडेटेड टोटल इनकम (Total Income) भी 16.54% गिरकर ₹97.76 करोड़ रह गई।
स्टैंडअलोन (Standalone) आधार पर भी कंपनी की हालत कुछ खास नहीं रही। स्टैंडअलोन रेवेन्यू 13.50% घटकर ₹96.39 करोड़ रहा, जिस पर ₹14.72 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट लॉस दर्ज किया गया। एसोसिएट कंपनियों (Associate Companies) से हुए घाटे का असर भी कंसोलिडेटेड नतीजों पर दिखा, जिसने deficit में ₹14.78 करोड़ का योगदान दिया। कंपनी ने यह भी बताया कि आर्बिट्रेशन सेटलमेंट (Arbitration Settlement) के तहत Ebix International Holdings Limited में 51% इक्विटी शेयर (Equity Shares) ट्रांसफर का काम पूरा हो गया है।
निवेशकों की चिंताएं क्यों बढ़ीं?
राजस्व में गिरावट के साथ-साथ घाटे का बढ़ना यह दर्शाता है कि कंपनी मुश्किल दौर से गुजर रही है। चिंता की बात यह है कि कंपनी पर डेट (Debt) का बोझ बढ़ा है, जो मार्च 2025 में ₹37.70 करोड़ से बढ़कर सितंबर 2025 तक ₹68.82 करोड़ हो गया है। इसके अलावा, शेयरहोल्डर की मंजूरी के बिना रिलेटेड-पार्टी ट्रांजेक्शन (Related-Party Transactions) किए जाने के मामले ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) और वित्तीय जोखिमों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे क्या?
शेयरहोल्डर्स को अब गिरते रेवेन्यू और बढ़ते घाटे के चलते कंपनी के भविष्य को लेकर चिंता सता रही है। कंपनी को अपने बढ़ते कर्ज को संभालने और ब्याज लागत को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय कदम उठाने होंगे। साथ ही, शेयरहोल्डर की पूर्व मंजूरी के बिना बड़े ट्रांजैक्शन करने जैसे कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मुद्दों पर विशेष ध्यान देना होगा।
