Vedanta Limited ने अपने बोर्ड को और मजबूत करते हुए SEBI (Securities and Exchange Board of India) के पूर्व कार्यकारी निदेशक S.V. Murali Dhar Rao को नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त करने का ऐलान किया है। यह नियुक्ति 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी और उनका एक साल का कार्यकाल 31 मार्च 2027 तक रहेगा। इस बदलाव के साथ ही Dindayal Jalan, जो नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर थे, उनका कार्यकाल 31 मार्च 2026 को पूरा हो जाएगा।
कंपनी ने अपने महत्वाकांक्षी कॉम्पीटिटिव स्कीम ऑफ अरेंजमेंट (Composite Scheme of Arrangement) को पूरा करने की समय सीमा में भी विस्तार किया है। पहले यह डेडलाइन 31 मार्च 2026 थी, जिसे अब बढ़ाकर 30 जून 2026 कर दिया गया है। इस विस्तार की मुख्य वजह सरकारी प्राधिकरणों से आवश्यक मंजूरियों में हो रही देरी है, जो Vedanta के मल्टी-स्टेज रीस्ट्रक्चरिंग प्लान की जटिलताओं को उजागर करती है।
SEBI में रेगुलेटरी मामलों में Mr. Rao का अनुभव बोर्ड की स्वतंत्रता और निगरानी को बेहतर बनाने में मददगार साबित होगा। वहीं, स्कीम ऑफ अरेंजमेंट की बढ़ी हुई समय सीमा Vedanta के कॉरपोरेट रीस्ट्रक्चरिंग के लंबे और पेचीदा सफर को दर्शाती है, जिसका अंतिम लक्ष्य वैल्यू अनलॉक करना और कंपनी के विभिन्न ऑपरेशंस को सुव्यवस्थित करना है।
Vedanta की यह कॉम्पीटिटिव स्कीम ऑफ अरेंजमेंट एक व्यापक डीमर्जर योजना है। इसके तहत कंपनी अपने मेटल्स, माइनिंग, ऑयल एंड गैस और पावर जैसे विभिन्न व्यवसायों को पांच अलग-अलग लिस्टेड एंटिटीज में बांटने का इरादा रखती है। इस स्ट्रेटेजिक कदम का उद्देश्य ग्रुप की जटिल संरचना को सरल बनाना, कर्ज का बोझ कम करना और हर बिजनेस यूनिट को अपने स्वतंत्र ग्रोथ पाथ पर आगे बढ़ने में सक्षम बनाना है। यह योजना 2023 से ही प्रक्रिया में है, लेकिन नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), SEBI और कई सरकारी निकायों से आवश्यक मंजूरी मिलने में हो रही देरी के कारण इसे कई बार बाधाओं का सामना करना पड़ा है। SEBI में कॉर्पोरेट फाइनेंस और मार्केट रेगुलेशन जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभालने वाले Mr. Rao का अनुभव, इस जटिल रीस्ट्रक्चरिंग के दौरान रेगुलेटरी इनसाइट प्रदान करने में बेहद अहम होगा।
शेयरहोल्डर्स के लिए, इस अपडेट का सबसे सीधा असर कॉम्पीटिटिव स्कीम ऑफ अरेंजमेंट की नई समय-सीमा पर पड़ेगा, जिसका मतलब है कि रीस्ट्रक्चरिंग के पूर्ण लाभों को देखने के लिए उन्हें अभी और धैर्य रखना होगा। निवेशकों के लिए मुख्य जोखिम सरकारी मंज़ूरी पर स्कीम का सफल और समय पर पूरा होना है। इसके अलावा, Viceroy Research द्वारा जुलाई 2025 में SEBI को की गई शिकायत में उठाए गए गवर्नेंस और पारदर्शिता से जुड़े सवाल भी निवेशकों के लिए अहम बने रहेंगे।
