लिक्विडेशन प्रक्रिया में नया मोड़: SCC लिस्ट और क्रेडिटर क्लेम्स का खुलासा
Ushdev International Ltd. का लिक्विडेशन (liquidation) प्रोसेस लगातार आगे बढ़ रहा है। कंपनी ने अपने स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन कमेटी (SCC) के सदस्यों की अपडेटेड लिस्ट जारी की है, जो इस प्रक्रिया की निगरानी में अहम भूमिका निभाएगी। साथ ही, 23 अप्रैल 2026 तक क्रेडिटर क्लेम्स (creditor claims) का विस्तृत ब्योरा भी सामने आया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक किसी भी क्रेडिटर के क्लेम को रिजेक्ट (reject) नहीं किया गया है। हालांकि, ₹4,177,008,177 की राशि अभी वेरिफाई (verify) की जा रही है। इस मामले में सबसे बड़ा सिक्योर्ड क्रेडिटर (secured creditor) क्लेम State Bank of India (SBI) का है, जो ₹25,411,486,381 का है।
ये अपडेट क्यों है अहम?
यह नई जानकारी Ushdev International के लिक्विडेशन से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स (stakeholders) के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अपडेटेड SCC लिस्ट यह सुनिश्चित करती है कि गवर्नेंस (governance) सही तरीके से बनी रहे, वहीं क्रेडिटर क्लेम्स की स्थिति से यह पता चलता है कि कंपनी की कुल कितनी देनदारियां (liabilities) हैं जिन्हें कंपनी की एसेट्स (assets) से चुकाना होगा। यह Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के तहत कंपनी के बंद होने की प्रक्रिया का एक अहम कदम है।
कंपनी के बैकग्राउंड पर एक नजर
Ushdev International Ltd. फाइनेंशियल दिक्कतों के चलते मई 2018 में Corporate Insolvency Resolution Process (CIRP) में आई थी। यह कंपनी मेटल ट्रेडिंग और विंड पावर EPC का काम करती थी। कंपनी के लिए Taguda Pte Ltd. का एक रेजोल्यूशन प्लान (resolution plan) भी आया था, जिसे कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (Committee of Creditors) और NCLT (National Company Law Tribunal) ने फरवरी 2022 में मंजूरी दे दी थी। लेकिन, जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल (regulatory approvals) न मिलने के कारण यह प्लान फेल हो गया। इसके बाद, NCLT मुंबई ने 16 अक्टूबर 2025 को कंपनी को लिक्विडेट (liquidate) करने का आदेश सुनाया।
अब आगे क्या?
- पारदर्शिता बढ़ी: SCC की नई लिस्ट से लिक्विडेशन फेज के लिए गवर्नेंस स्ट्रक्चर (governance structure) साफ हुआ है।
- देनदारियों की तस्वीर साफ: माने गए और पेंडिंग क्लेम्स की स्थिति से एसेट्स के बंटवारे की दिशा तय होगी।
- प्रक्रिया जारी: लिक्विडेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जिसमें अब एसेट्स की वसूली और देनदारियों के निपटान पर ध्यान दिया जाएगा।
- शेयरहोल्डर्स की स्थिति: इक्विटी होल्डर्स (equity holders) के लिए, सारी क्रेडिटर देनदारियों के भुगतान के बाद बची हुई किसी भी रकम की उम्मीद कम ही होती है।
जोखिम जिन पर नजर रखनी होगी:
- क्लेम्स में बदलाव का खतरा: IBBI नियमों के अनुसार, क्लेम्स में आगे चलकर बदलाव, सुधार या उन्हें रिजेक्ट किया जा सकता है।
- समय सीमा का मुद्दा: कई ऑपरेशनल क्रेडिटर्स (operational creditors) और कर्मचारियों ने तय समय सीमा के बाद क्लेम सबमिट किए हैं, जिनकी स्वीकार्यता CIRP के पिछले मूल्यांकनों पर निर्भर करेगी।
- एसेट्स पर अधिकार: State Bank of India और Canara Bank का कुछ खास एसेट्स पर विशेष चार्ज (charge) है, जिससे अन्य क्रेडिटर्स के लिए उपलब्ध एसेट्स का पूल सीमित हो सकता है।
- बैंक फ्रॉड के आरोप: Enforcement Directorate (ED) ने ₹132.85 करोड़ की संपत्ति अटैच की है। यह बैंक फ्रॉड (bank fraud) का मामला है, जिसमें प्रमोटर्स पर ₹1,438 करोड़ की हेराफेरी का आरोप है।
- मार्केट मैनिपुलेशन पर फाइन: SEBI (Securities and Exchange Board of India) ने पहले भी कंपनी के शेयर्स में गड़बड़ी के लिए ₹2.45 करोड़ का फाइन लगाया था।
तुलनात्मक स्थिति:
भारत में EPC कंपनियां अक्सर प्रोजेक्ट में देरी और फंड की कमी के कारण इनसॉल्वेंसी (insolvency) का सामना करती हैं। Ushdev International के लिक्विडेशन में जाने के विपरीत, कुछ अन्य EPC फर्म्स जैसे Dharan Infra-EPC Limited ने अपने CIRP के भीतर सेटलमेंट हासिल किया है।
