Usha Martin ने अपने Q4 FY26 के नतीजे जारी कर दिए हैं, और यह कंपनी के लिए एक बड़ा माइलस्टोन साबित हुआ है। कंपनी ने ₹212 करोड़ का रिकॉर्ड EBITDA हासिल किया है, जो कि कंपनी के स्टील बिजनेस को बेचने के बाद से अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस दौरान कंपनी की ऑपरेटिंग मार्जिन 21.6% रही।
सबसे बड़ी बात यह है कि Usha Martin अब ₹332 करोड़ के Net Cash Positive में आ गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹63 करोड़ के नेट डेट (Net Debt) में थी। कंपनी का स्टैंडअलोन ऑपरेशन अब पूरी तरह से डेट-फ्री (Debt-Free) हो गया है।
'One Usha Martin' प्रोग्राम के तहत पिछले 18 महीनों में ₹65-70 करोड़ की लागत में बचत हुई है। इसके साथ ही फिक्स्ड इम्प्लॉई कॉस्ट (Fixed Employee Costs) में 3% की कमी आई है। कंपनी का अब 57% रेवेन्यू इंटरनेशनल मार्केट से आ रहा है, जो माइनिंग, क्रेन और ऑफशोर जैसे हाई-परफॉरमेंस रोप सेगमेंट पर फोकस को दर्शाता है।
यह शानदार प्रदर्शन Usha Martin की रणनीतिक री-अलाइनमेंट (Strategic Realignment) का नतीजा है, खासकर मार्च 2023 में Tata Steel को अपने स्टील बिजनेस की बिक्री के बाद। इस कदम ने कंपनी को अपने मुख्य वायर रोप और स्पेशियलिटी प्रोडक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करने में मदद की है, जिससे बैलेंस शीट डेट में भारी कमी आई है।
कंपनी ने 20% ऑपरेटिंग मार्जिन का नया मिनिमम बेंचमार्क सेट किया है। अगले दो सालों में ₹300 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) प्लान है, जिससे स्पेशलाइज्ड प्रोडक्ट्स की क्षमता बढ़ाई जाएगी। कंपनी अगले 2-3 सालों में 10-12% वॉल्यूम ग्रोथ का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिसमें इंटरनेशनल मार्केट पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं, जैसे मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव के कारण 900 टन वॉल्यूम में कमी आई है। स्टील, गैस और लॉजिस्टिक्स जैसी इनपुट कॉस्ट (Input Costs) जनवरी 2026 से बढ़ी हैं, लेकिन कंपनी ग्राहकों पर यह लागत डाल रही है। एलपीजी (LPG) की लागत दोगुनी होने से ₹4.5-5 करोड़ प्रति माह का अतिरिक्त खर्च आ रहा है, जिसे नेचुरल गैस में शिफ्ट करके कुछ हद तक मैनेज किया जा रहा है।
Usha Martin के स्पेशलाइज्ड वायर रोप बिजनेस के लिए सीधे तौर पर लिस्टेड पीयर्स (Listed Peers) ढूंढना मुश्किल है। अनलिस्टेड स्पेस में Bharat Wire Rope एक प्रमुख प्लेयर है।
