साल भर के नतीजे भी रहे दमदार
Usha Martin Ltd. ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए मजबूत प्रदर्शन किया है। पूरे साल का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 7.01% बढ़कर ₹3,759.94 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 14.76% की उछाल के साथ ₹466.31 करोड़ दर्ज किया गया।
कर्ज़ में बड़ी कटौती, शेयरहोल्डर्स को मिलेगा डिविडेंड
कंपनी की वित्तीय सेहत में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिसका मुख्य कारण कंसोलिडेटेड उधार (borrowings) में भारी कमी है। FY25 में जहां यह ₹337.56 करोड़ था, वहीं FY26 में घटकर सिर्फ ₹145.54 करोड़ रह गया। इस कमी से कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत हुई है और फाइनेंस कॉस्ट में भी कमी आई है। कंपनी के बोर्ड ने ₹3.75 प्रति शेयर के डिविडेंड (dividend) की सिफारिश की है, जो कंपनी के प्रदर्शन और शेयरहोल्डर्स को रिटर्न देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कंपनी का बिज़नेस और भविष्य की रणनीति
Usha Martin, जो वायर रोप्स (wire ropes) और स्पेशियलिटी स्टील (specialty steel) की एक ग्लोबल निर्माता है, ने पिछले कुछ सालों से अपने बैलेंस शीट से कर्ज़ कम करने की एक बहु-वर्षीय रणनीति अपनाई है। इसका मकसद वित्तीय मजबूती और प्रॉफिटेबिलिटी को बढ़ाना है। कंपनी अपने मुख्य व्यावसायिक क्षेत्रों में ऑपरेशनल एफिशिएंसी (operational efficiency) को बेहतर बनाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।
एक बड़ा जोखिम: रांची ज़मीन मामले में कानूनी कार्यवाही
हालांकि, कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम बना हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई (CBI) द्वारा रांची में कुछ ज़मीन के टुकड़ों को लेकर चल रही कानूनी कार्यवाही कंपनी पर असर डाल सकती है। इन मामलों में कुल दावा ₹1,903.7 करोड़ (₹19,037 लाख) का है। कंपनी मैनेजमेंट का कहना है कि फिलहाल इसके लिए किसी वित्तीय समायोजन (financial adjustments) की आवश्यकता नहीं है, लेकिन यह मामला कंपनी के लिए एक चिंता का विषय बना हुआ है।
प्रतिस्पर्धी परिदृश्य
वायर रोप्स सेक्टर में, Usha Martin का मुकाबला Bharat Wire Ropes Ltd. जैसी कंपनियों से है। APAR Industries Ltd. भी एक प्रासंगिक प्रतिस्पर्धी है, हालांकि उसका प्रोडक्ट पोर्टफोलियो (product portfolio) अधिक व्यापक है।
