Uravi Defence and Technology Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के अनऑडिटेड कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दे दी है। इस तिमाही में कंपनी ने 1.8% की मामूली बढ़ोतरी के साथ ₹10.20 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया। हालांकि, पिछले साल की समान तिमाही में ₹27.50 लाख का प्रॉफिट कमाने वाली कंपनी को इस बार ₹0.85 लाख का नेट लॉस हुआ है। कंपनी के अनुसार, यह बढ़ी हुई लागत (higher costs) और अन्य आय में कमी (reduced other income) के कारण हुआ है।
फाइनेंशियल ईयर 2026 की पहली नौ महीनों (9M FY26) में भी कंपनी की परफॉरमेंस कमजोर रही। इस अवधि में रेवेन्यू घटकर ₹28.76 करोड़ रह गया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर की इसी अवधि में ₹32.24 करोड़ था। वहीं, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) भी लगभग आधा होकर ₹52.70 लाख पर आ गया, जबकि 9M FY25 में यह ₹102.61 लाख था।
कंपनी कुछ बड़े रणनीतिक कदम भी उठा रही है। Uravi Defence अपनी सहायक कंपनी SKL (India) Private Limited में अपनी 50.01% हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में तेजी ला रही है। इसके अलावा, कंपनी नवंबर 2025 से लागू होने वाले नए लेबर कोड बिल (Labour Code Bill) के प्रभाव का भी गहन मूल्यांकन कर रही है।
Uravi Defence मुख्य रूप से डिफेंस इक्विपमेंट, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, सिमुलेटर और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सॉल्यूशंस के निर्माण से जुड़ी है। इस तिमाही में घाटा और नौ महीनों में प्रॉफिट में गिरावट कंपनी के लिए परिचालन संबंधी चुनौतियों (operational challenges) की ओर इशारा कर रही है। ऐसे में, SKL (India) के डिसइन्वेस्टमेंट और लेबर लॉ के असर पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी।
भारत के डिफेंस सेक्टर में काम करने वाली Uravi Defence की तुलना में Paras Defence and Space Technologies Ltd और Data Patterns (India) Ltd जैसी कंपनियां हाल के नतीजों में मजबूत ग्रोथ दिखा रही हैं, जो Uravi Defence के मौजूदा प्रदर्शन से अलग है।
