Uno Minda Limited की सब्सिडियरी Minda Westport Technologies Limited (MWTL) के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। कंपनी पर कस्टम्स विभाग ने इम्पोर्ट किए गए पुर्जों की कथित गलत क्लासिफिकेशन (misclassification) के आरोप में कुल ₹51.14 करोड़ की मांग रखी है। इस रकम में ₹25.57 करोड़ का टैक्स और ₹25.57 करोड़ का जुर्माना शामिल है। यह मामला व्हीकल के लिए CNG सिस्टम पार्ट्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले कॉम्पोनेन्ट्स से जुड़ा है।
MWTL इस कस्टम्स ऑर्डर के खिलाफ अपील करने की अपनी मंशा जाहिर कर चुकी है। वहीं, पैरेंट कंपनी Uno Minda Limited ने यह स्पष्ट किया है कि इस डेवलपमेंट का कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ या ऑपरेशनल एक्टिविटीज पर कोई बड़ा असर पड़ने की आशंका नहीं है।
MWTL भारत के अल्टरनेट फ्यूल सिस्टम्स (AFS) मार्केट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 2009 से यह कंपनी CNG और LPG किट्स व कॉम्पोनेन्ट्स का उत्पादन कर रही है, जो ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEM) और आफ्टरमार्केट दोनों के लिए सप्लाई होते हैं। Uno Minda ने हाल में MWTL में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई थी, जिसका मकसद अल्टरनेट फ्यूल और इलेक्ट्रिक व्हीकल कॉम्पोनेन्ट्स सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करना था। यह भी उल्लेखनीय है कि Uno Minda स्वयं जुलाई 2025 में ऐसे ही एक मामले में ₹4.29 करोड़ के जुर्माने और ₹1 करोड़ के छुड़ाने वाले जुर्माने (redemption fine) का सामना कर चुकी है।
अब MWTL कस्टम्स ऑर्डर को चुनौती देने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगी। कंपनी का मैनेजमेंट इस मामले को सुलझाने को लेकर आश्वस्त है, और उन्हें उम्मीद है कि वे या तो इस आदेश को पलटवा लेंगे या फिर जरूरत पड़ने पर आवश्यक वित्तीय प्रावधान (financial provision) कर लेंगे। इंपोर्ट क्लासिफिकेशन और कस्टम नियमों की जटिलता अक्सर ऐसे विवादों को जन्म देती है, और इस मामले में मुख्य जोखिम अपील के नतीजे पर टिका है। यदि फैसला MWTL के खिलाफ आता है, तो कंपनी को पूरी ₹51.14 करोड़ की रकम चुकानी पड़ सकती है।
Uno Minda, Schaeffler India, Samvardhana Motherson International, Endurance Technologies और Sona BLW Precision Forgings जैसी कंपनियों के साथ एक प्रतिस्पर्धी माहौल में काम करती है। ये सभी कंपनियां भी रेगुलेटरी माहौल और जटिल सप्लाई चेन्स को मैनेज करती हैं। निवेशक अब MWTL की अपील की प्रगति और अंतिम नतीजे पर नज़र रखेंगे। साथ ही, इस संभावित देनदारी के लिए कंपनी द्वारा किए जाने वाले किसी भी वित्तीय प्रावधान (financial provision) पर भी ध्यान दिया जाएगा।
