Q4 में रेवेन्यू में तूफानी तेजी
Triveni Turbine Ltd ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए चौथे क्वार्टर (Q4 FY26) और पूरे फाइनेंशियल ईयर के नतीजे जारी किए हैं। चौथे क्वार्टर में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 24.75% बढ़कर ₹696 करोड़ (₹6,960 मिलियन) पर पहुंच गया। स्टैंडअलोन रेवेन्यू में भी 21.10% का इजाफा हुआ और यह ₹615.30 करोड़ (₹6,153 मिलियन) रहा।
पूरे साल का रेवेन्यू बढ़ा, पर प्रॉफिट पर पड़ा असर
पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 में, Triveni Turbine का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 8.18% की बढ़त के साथ ₹2,257.60 करोड़ (₹22,576 मिलियन) दर्ज किया गया। वहीं, स्टैंडअलोन रेवेन्यू 10.99% बढ़कर ₹2,072.90 करोड़ (₹20,729 मिलियन) रहा।
रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद, FY26 में कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) पिछले साल के ₹358.60 करोड़ (₹3,586 मिलियन) की तुलना में मामूली घटकर ₹349.40 करोड़ (₹3,494 मिलियन) रहा। इस गिरावट की मुख्य वजह ऑपरेटिंग खर्चों में बढ़ोतरी और ₹15.70 करोड़ (₹157 मिलियन) की एक असाधारण लागत (exceptional cost) रही। कुल कंसोलिडेटेड खर्च FY25 में ₹1,598.30 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹1,767.50 करोड़ हो गया।
200% डिविडेंड का ऐलान और क्लीन ऑडिट
कंपनी के बोर्ड ने 200% का फाइनल डिविडेंड (₹2 प्रति शेयर) देने की सिफारिश की है। यह कंपनी के मजबूत फाइनेंशियल हेल्थ की ओर इशारा करता है। Triveni Turbine को अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर एक अनमॉडिफाइड ऑडिट ओपिनियन (unmodified audit opinion) भी मिला है, जो कंपनी की अकाउंटिंग और रिपोर्टिंग की पारदर्शिता को दर्शाता है।
भविष्य की मांग और विस्तार योजनाएं
कंपनी का यह प्रदर्शन रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) और इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग (Industrial Manufacturing) जैसे सेक्टर्स से अपने प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की मजबूत मांग को दर्शाता है। Triveni Turbine अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी (manufacturing capacity) का लगातार विस्तार कर रही है और भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए अपने ऑर्डर बुक को मजबूत कर रही है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों की नजर कंपनी की उन स्ट्रैटेजी पर रहेगी जो बढ़ते ऑपरेटिंग खर्चों को कंट्रोल करने और प्रॉफिटेबिलिटी मार्जिन (profitability margins) को बनाए रखने में मदद करेंगी। ऑर्डर बुक की एग्जीक्यूशन स्पीड (execution speed) और हाल ही में बढ़ाई गई कैपेसिटी का भविष्य के रेवेन्यू पर क्या असर पड़ेगा, यह भी अहम होगा। नए लेबर कोड (New Labour Code) के चलते कर्मचारियों के लाभ से जुड़े खर्चों पर भी नजर रहेगी।