Triton Valves Limited के शेयरधारकों ने कंपनी की भविष्य की विकास योजनाओं को पंख लगाने वाले महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर अपनी भारी सहमति जताई है। हाल ही में संपन्न हुए पोस्टल बैलट के नतीजे बताते हैं कि शेयरधारकों ने कंपनी के विस्तार और बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) के लिए एकजुट होकर वोट किया है।
ग्रोथ के लिए बड़ी मंजूरी
कंपनी के अधिकृत शेयर कैपिटल (Authorized Share Capital) को ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ करने के प्रस्ताव को 5,48,760 वोटों से मंजूरी मिली है। यह कदम कंपनी को भविष्य में विस्तार, अधिग्रहण या अन्य पूंजी जुटाने की गतिविधियों के लिए बड़ी वित्तीय सहूलियत देगा।
शेयरधारकों को मिलेगा बोनस का तोहफा
इसी तरह, शेयरधारकों को पुरस्कृत करने के लिए बोनस शेयर (Bonus Shares) जारी करने के प्रस्ताव को भी 5,48,760 वोटों से शानदार समर्थन मिला। यह शेयरधारकों के लिए एक बड़ा तोहफा साबित होगा, क्योंकि कंपनी अपने संचित मुनाफे को बिना तत्काल नकदी के वितरण के शेयरधारकों के साथ साझा करेगी, जिससे शेयर की लिक्विडिटी (Liquidity) भी बढ़ सकती है। कंपनी ने इससे पहले फरवरी 2023 में 1:2 के अनुपात में बोनस शेयर जारी किए थे, और अब 2026 में 3:1 के अनुपात में बोनस शेयर की घोषणा पहले ही हो चुकी थी, जिसकी मंजूरी का इंतजार था।
बोर्ड को मिली मजबूती
बोर्ड को मजबूत करने के लिए, अशोक कुमार डैश को स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) के तौर पर नियुक्त करने को 5,48,748 वोटों से मंजूरी मिली है। डैश, जिन्हें Maruti Suzuki जैसे बड़े नामों के साथ 39 साल का अनुभव है, बोर्ड की विशेषज्ञता को बढ़ाने और कॉर्पोरेट गवर्नेंस की निगरानी को मजबूत करने में मदद करेंगे।
कंपनी का बिजनेस और नतीजे
Triton Valves औद्योगिक वाल्व और ऑटोमोटिव टायर ट्यूब वाल्व बनाने वाली एक जानी-मानी कंपनी है, जो तेल एवं गैस, पेट्रोकेमिकल और पावर जैसे प्रमुख क्षेत्रों को सेवा प्रदान करती है। कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजों में भी मजबूती दिखी है, जिसमें Q3 FY26 में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (Consolidated Revenue) में 25.6% और नेट प्रॉफिट (Net Profit) में 147% की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई है।
जोखिम और आगे का रास्ता
हालांकि, कंपनी कुछ जोखिमों का भी सामना कर रही है। Triton Valves को ₹9.32 करोड़ के टैक्स डिमांड नोटिस का सामना करना पड़ा था, जिसे कर्नाटक हाई कोर्ट ने पुनर्विचार के लिए भेजा है। कंपनी का कहना है कि इसका वित्तीय या परिचालन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा, SEBI द्वारा 2005 से जुड़े कथित मैनिपुलेटिव ट्रेडिंग की पुरानी जांचें भी विचाराधीन हैं। इसी तरह के सेक्टर में KSB Ltd. जैसी कंपनियां भी काम करती हैं।
अब निवेशक बोनस शेयर जारी होने की समय-सीमा और अधिकृत पूंजी में वृद्धि के इस्तेमाल पर नजर रखेंगे। कंपनी की नई वर्टिकल जैसे EV कंपोनेंट्स और क्लाइमेट टेक में विस्तार की योजनाओं पर भी ध्यान रहेगा।
