कंपनी ने 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही के लिए अपने QIP (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट) फंड के इस्तेमाल की रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, ₹500 करोड़ के QIP इश्यू से मिले फंड में से ₹205.43 करोड़ अभी भी अप्रयुक्त (unutilized) पड़े हैं। अच्छी बात यह है कि मॉनिटरिंग एजेंसी (India Ratings & Research) ने पुष्टि की है कि फंड का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए हो रहा है जिसके लिए इसे उठाया गया था। हालांकि, QIP से फंड किए जा रहे सभी प्रोजेक्ट्स की कंप्लीशन डेट को बढ़ाकर जुलाई 2026 कर दिया गया है, जिससे ग्रोथ को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
इसके अलावा, फंड जुटाने की प्रक्रिया (QIP इश्यू) से जुड़े खर्चों में भी इजाफा हुआ है। कंपनी ने इश्यू एक्सपेंस पर कुल ₹14.18 करोड़ खर्च किए हैं, जो कि शुरुआती अनुमान ₹11.19 करोड़ से ₹2.99 करोड़ ज्यादा है। कंपनी के बोर्ड ने इस अतिरिक्त खर्च को अपनी मंजूरी दे दी है।
यह अपडेट निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कंपनी के कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) और ग्रोथ पहलों में संभावित देरी का संकेत देता है। हालांकि मुख्य उद्देश्य पूरे हो रहे हैं, पर प्रोजेक्ट्स की कंप्लीशन में देरी और खर्चों में बढ़ोतरी निवेशकों को फंड के कुशल उपयोग पर सवाल उठाने पर मजबूर कर सकती है।
Transformers and Rectifiers (India) Ltd ने जून 2024 के दौरान ₹500 करोड़ का QIP जारी किया था। इस फंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से कैपिटल एक्सपेंडिचर, कर्ज चुकाने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और संभावित इनऑर्गेनिक ग्रोथ के लिए किया जाना था। यह फंडरेजिंग कंपनी की बड़ी रणनीति का हिस्सा थी, जिसमें अक्टूबर 2023 में ₹120 करोड़ का प्रेफरेंशियल इश्यू भी शामिल था।
निवेशकों को अब कुछ प्रमुख जोखिमों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। सबसे पहले, प्रोजेक्ट्स के पूरा होने की समय-सीमा का FY2025 से जुलाई 2026 तक खिसक जाना, जो प्रोजेक्ट एक्जीक्यूशन में आने वाली चुनौतियों को दर्शाता है। दूसरा, इश्यू एक्सपेंस में बढ़ोतरी, जो कॉस्ट मैनेजमेंट पर सवाल उठाती है। एक और महत्वपूर्ण चिंता नवंबर 2025 में वर्ल्ड बैंक द्वारा जारी किया गया डिबारमेंट नोटिस है, जिसे कंपनी नाइजीरिया में एक प्रोजेक्ट में धोखाधड़ी और भ्रष्ट आचरण के आरोपों के चलते चुनौती दे रही है।
भारतीय ट्रांसफॉर्मर मैन्युफैक्चरिंग मार्केट में, ट्रांसफॉर्मर्स एंड रेक्टिफायर्स इंडिया लिमिटेड BHEL, Siemens India और CG Power जैसी बड़ी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है।
अब निवेशकों को बचे हुए ₹205.43 करोड़ के QIP फंड के उपयोग पर नजर रखनी होगी, साथ ही वर्ल्ड बैंक डिबारमेंट मामले में कंपनी के रुख और प्रोजेक्ट्स की असल कंप्लीशन डेट पर भी ध्यान देना होगा।
