कैसे हासिल हुआ यह मुकाम?
TRIL के इस शानदार प्रदर्शन के पीछे कई वजहें हैं। कंपनी के पास ₹5,000 करोड़ से भी ज्यादा का मजबूत ऑर्डर बुक है, जो आने वाले 18 महीनों तक रेवेन्यू की गारंटी देता है। इसके अलावा, कंपनी ने हाई-वैल्यू वाले HVDC (हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट) सेक्टर में कदम रखा है, जो भविष्य में कमाई का एक बड़ा जरिया बन सकता है।
क्षमता विस्तार और मार्जिन पर फोकस
कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को 40,000 MVA से बढ़ाकर 75,000 MVA करने जा रही है। मैनेजमेंट ने साफ कर दिया है कि अब कंपनी सिर्फ मार्जिन-आधारित ग्रोथ पर ध्यान केंद्रित करेगी। वे ऐसे ही ऑर्डर लेंगे जिनसे बेहतर मुनाफा हो। इस स्ट्रेटेजी के तहत, कंपनी EBITDA मार्जिन को FY27 तक 15-17% तक ले जाने का लक्ष्य रखती है। बैकवर्ड इंटीग्रेशन (Backward Integration) से भी मार्जिन में 200-300 बेसिस पॉइंट का सुधार होने की उम्मीद है।
खास उपलब्धि और आगे की राह
TRIL भारत की पहली कंपनी बन गई है जिसने PGCIL से HVDC ट्रांसफार्मर रिपेयर का ऑर्डर हासिल किया है। यह स्पेशलाइज्ड सेक्टर में कंपनी के लिए एक बड़ी सफलता है। मैनेजमेंट जानबूझकर उन ऑर्डर्स को टाल रहा है जिनकी डिलीवरी 24 महीनों से ज्यादा की है, ताकि प्रॉफिटेबिलिटी बनी रहे।
कंपनी का इतिहास और चुनौतियां
1994 में स्थापित TRIL पावर सेक्टर की एक प्रमुख कंपनी है। कंपनी पहले भी क्षमता विस्तार कर चुकी है। हालांकि, कंपनी को कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है। वर्ल्ड बैंक की एक इंक्वायरी पर 45 दिनों में फैसला आने की उम्मीद है। कच्चे माल जैसे कॉपर और गैस की सप्लाई चेन में दिक्कतें बनी हुई हैं। इसके अलावा, वर्किंग कैपिटल (Working Capital) में इन्वेंटरी और रिसीवेबल्स (Receivables) का लेवल भी थोड़ा ज्यादा है।
प्रतिस्पर्धी माहौल
TRIL का मुकाबला Siemens Limited, ABB India Limited, Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL), और Kirloskar Electric Company Limited जैसी बड़ी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से है।
