चौथी तिमाही में भी मार्जिन पर दबाव
साल भर के नतीजों के साथ, Timken India की चौथी तिमाही (Q4) के आंकड़े भी सामने आए हैं, जहां तस्वीर कुछ ऐसी ही दिखी। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 12.94% बढ़कर ₹10,906.42 करोड़ पर पहुंचा, लेकिन नेट प्रॉफिट में 16.82% की भारी गिरावट आई और यह ₹1,583.05 करोड़ रहा।
मुनाफे में गिरावट की मुख्य वजह
मुनाफे में इस गिरावट की मुख्य वजह कंपनी के कुल खर्चे (Consolidated Expenses) रहे, जो सालाना आधार पर 10.46% बढ़ गए। इसका मतलब है कि कंपनी का मुनाफा आय से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ा, जिससे प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव साफ दिख रहा है।
शेयरधारकों को बड़ा झटका
शेयरधारकों के लिए एक और बड़ा झटका डिविडेंड को लेकर है। पिछले साल ₹36.00 प्रति शेयर का अच्छा डिविडेंड देने वाली कंपनी ने इस बार सिर्फ ₹2.50 प्रति शेयर की सिफारिश की है। यह बड़ी कटौती कंपनी की कैश कंजर्वेशन (Cash Conservation) या प्रॉफिट को लेकर कम उम्मीदें दर्शाती है।
GGB Technology का अधिग्रहण और भविष्य की रणनीति
हालांकि, कंपनी भविष्य के लिए अपनी रणनीति पर भी काम कर रही है। Timken India ने हाल ही में GGB Technology में मेजॉरिटी स्टेक (Majority Stake) खरीदा है, जो प्लेन बेयरिंग्स (Plain Bearings) की दुनिया की एक बड़ी कंपनी है। GGB Technology का कंपनी में विलय (Amalgamation) किया जा रहा है, जिसका मकसद तालमेल (Synergies) का फायदा उठाना और बाजार में अपनी पैठ बढ़ाना है। इस इंटीग्रेशन के चलते कंपनी की कुल संपत्ति (Total Assets) FY26 में बढ़कर ₹37,003.34 मिलियन हो गई, जो FY25 में ₹34,879.17 मिलियन थी।
प्रतिस्पर्धियों से तुलना और निवेशकों की चिंताएं
यह ध्यान देने वाली बात है कि Timken India का मुनाफा जहां घटा है, वहीं इसके कुछ कॉम्पिटिटर्स जैसे SKF India ने स्थिर मुनाफा दिखाया है, जबकि Schaeffler India ने हालिया तिमाही में डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज की है। निवेशकों की चिंताएं बढ़ती ऑपरेटिंग कॉस्ट्स (Operating Costs) को प्रभावी ढंग से मैनेज करने और प्रॉफिट मार्जिन को फिर से पटरी पर लाने को लेकर हैं। डिविडेंड में भारी कटौती भी शेयरधारकों के लिए चिंता का विषय है।