CIRP से बाहर आते ही बड़ा झटका: ₹82 लाख से ज़्यादा का घाटा
Techindia Nirman Limited ने हाल ही में कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेसोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से बाहर निकलने की घोषणा की है। लेकिन, कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के नतीजे चिंताजनक रहे। इस अवधि में कंपनी का रेवेन्यू (Revenue from operations) सिर्फ ₹0.03 लाख रहा, जबकि नेट लॉस (Net Loss) बढ़कर ₹82.70 लाख हो गया। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में दर्ज ₹39.69 लाख के लॉस से काफी ज़्यादा है।
5 मई 2026 को होगी महत्वपूर्ण AGM
कंपनी ने 5 मई 2026 को अपनी 45वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) बुलाने का ऐलान किया है। यह मीटिंग छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) स्थित कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस में होगी। CIRP से बाहर निकलने के बाद बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की पूरी पावर फिर से बहाल हो गई है, जो एक अहम कदम है।
AGM में ये अहम फैसले होंगे
इस AGM में शेयरहोल्डर्स (Shareholders) कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर वोट करेंगे। एजेंडा में 31 मार्च 2025 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के वित्तीय बयानों को अपनाना शामिल है। इसके साथ ही, M/s. KP Sahasrabudhe & Co. को स्टैट्यूटरी ऑडिटर (Statutory Auditor) के तौर पर अपॉइंट करने और मिस्टर वदला नागभूषणम (Mr. Vadla Nagabhushanam) व मिस्टर मधुकर देशपांडे (Mr. Madhukar Deshpande) जैसे इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स (Independent Directors) की फिर से नियुक्ति जैसे प्रस्तावों पर भी वोटिंग होगी।
पिछली चुनौतियां और ऑडिटर की चिंताएं
Techindia Nirman, जिसे पहले Nath Seeds Limited के नाम से जाना जाता था, का इतिहास वित्तीय और रेगुलेटरी चुनौतियों से भरा रहा है। कंपनी CIRP के दौर से गुज़री है, जिस दौरान बोर्ड की पावर निलंबित थी। NSE पर ट्रेडिंग भी नॉन-कंप्लायंस (Non-compliance) के कारण सस्पेंड (Suspended) थी।
FY24-25 के लिए ऑडिटर की रिपोर्ट ने कंपनी की कर्ज चुकाने की क्षमता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में एडवांसेज (Advances) की रिकवरी और प्रोजेक्ट डेवलपमेंट एक्सपेंसेस (Project Development Expenses) पर भी संदेह जताया गया है। SEBI (LODR) नियमों का पालन न करना, ग्रुप लोन पर अनप्रोवाइडेड इंटरेस्ट (Unprovided Interest) और एडवांसेज की रिकवरी पर अनिश्चितता जैसी चिंताओं को ऑडिटर ने अपने क्वालिफाइड ओपिनियन (Qualified Opinion) में उजागर किया है।
भविष्य की राह: निवेशकों के लिए क्या है खास?
AGM में ऑडिटर और डायरेक्टर्स की नियुक्ति पर शेयरहोल्डर्स का फैसला कंपनी के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा। निवेशकों की नज़रें इस बात पर होंगी कि कंपनी कैसे ऑडिटर की चिंताओं को दूर करती है और अपनी वित्तीय स्थिति को स्थिर करने के लिए ठोस कदम उठाती है। साथ ही, ट्रेडिंग सस्पेंशन हटने और SEBI LODR नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के प्रयासों पर भी खास ध्यान दिया जाएगा।
