मुंबई के कमिश्नर ऑफ CGST एंड सेंट्रल एक्साइज (Appeals-III) ने TeamLease Services लिमिटेड के खिलाफ ₹32.29 करोड़ का एक बड़ा जुर्माना बरकरार रखा है। यह फैसला 30 जनवरी, 2026 को जारी किया गया था। इस पेनल्टी (Penalty) का कारण यह है कि कंपनी पर आरोप है कि उसने जुलाई 2017 से जुलाई 2022 के बीच मैनपावर (Manpower) सर्विसेज के लिए बिना एक्चुअल सर्विस दिए इनवॉइस (Invoice) जारी किए।
TeamLease Services, जो भारत की जानी-मानी HR सॉल्यूशंस प्रोवाइडर है, इस ऑर्डर से असहमत है। कंपनी लीगल और ज्यूरिसडिक्शनल (Jurisdictional) मुद्दों को लेकर इस फैसले को हाई कोर्ट ऑफ कर्नाटक में एक रिट पिटीशन (Writ Petition) के ज़रिए चुनौती देने की योजना बना रही है।
इस जुर्माने की राशि कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण कंटीजेंट लायबिलिटी (Contingent Liability) है, जिसे FY25 के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में दर्ज किया गया है।
यह पहला मौका नहीं है जब TeamLease को रेगुलेटरी दिक्कतों का सामना करना पड़ा हो। पहले अप्रैल 2026 में, कंपनी को एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) से ₹184.58 करोड़ (ब्याज सहित) की डिमांड नोटिस के संबंध में एक शो कॉज नोटिस (Show Cause Notice - SCN) मिला था। मई 2026 में, TeamLease ने NEEM ट्रेनीज़ के क्लासिफिकेशन को लेकर EPFO के एक अन्य ऑर्डर को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें कंपनी का तर्क था कि वे प्रोविडेंट फंड के नियमों के तहत कर्मचारी नहीं हैं।
यह मामला भारत की स्टाफिंग इंडस्ट्री पर बढ़ते रेगुलेटरी फोकस को दर्शाता है। TeamLease के कॉम्पिटीटर्स (Competitors) जैसे Quess Corp, Randstad India, और Adecco India भी एक ऐसे ही रेग्युलेटेड माहौल में काम करते हैं।
आगे चलकर, शेयरहोल्डर्स (Shareholders) को हाई कोर्ट ऑफ कर्नाटक में फाइल की गई रिट पिटीशन के नतीजों पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए।
