कंप्लायंस में फेल: क्या है वजह?
Tayo Rolls Limited के पूर्व कंप्लायंस ऑफिसर ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को सूचित किया है कि 31 मार्च 2025 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए आवश्यक स्टैचूटरी कंप्लायंस की समय-सीमा को पूरा करना संभव नहीं हो पा रहा है। यह सब कंपनी की इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रक्रिया में चल रहे गतिरोध के कारण हुआ है। मुख्य विवाद कंपनी के एक्वायरर, झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL), और रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) के बीच है।
क्यों अटकी है प्रक्रिया?
कंपनी के आधिकारिक कम्युनिकेशन चैनल, जैसे ईमेल आईडी और वेबसाइट, भी फिलहाल काम नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति के चलते, कंपनी ने मिस की गई तिमाही और वार्षिक स्टैचूटरी कंप्लायंस के लिए लायबिलिटी से छूट का अनुरोध किया है। यह गतिरोध इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रक्रिया के बाद भी कंपनियों के सामने आने वाली लगातार चुनौतियों को उजागर करता है।
कंपनी का इंसॉल्वेंसी सफर
Tayo Rolls Limited, जो कभी टाटा स्टील की सहायक कंपनी थी, अप्रैल 2019 से कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने अक्टूबर 2019 में रेजोल्यूशन प्रोफेशनल, श्री अनीश अग्रवाल, को नियुक्त किया था। 17 दिसंबर 2024 को NCLT ने झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) की ओर से पेश किए गए रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। हालांकि, JBVNL ने बाद में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में अपील दायर की, जिसके कारण 30 जनवरी 2025 को प्लान के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी गई। JBVNL की अपील में कथित तौर पर कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) की मंजूरी के बिना रेजोल्यूशन प्लान में जमीन लीज से संबंधित बदलाव किए जाने का मुद्दा उठाया गया है।
शेयरधारकों पर असर और जोखिम
इस लगातार बने गतिरोध और NCLAT के स्टे ऑर्डर से Tayo Rolls के ऑपरेशन्स और कंप्लायंस फंक्शन्स ठप पड़ गए हैं। स्टैचूटरी फाइलिंग्स मिस करने से कंपनी BSE और अन्य अथॉरिटीज से संभावित पेनल्टी का सामना कर सकती है। यह अनिश्चितता उन मौजूदा शेयरधारकों को भी प्रभावित करती है जिनके शेयर कैंसिलेशन के लिए चिह्नित हैं, और JBVNL के अधिग्रहण की प्रगति को भी रोकती है।
आगे क्या?
NCLAT में JBVNL की अपील पर सुनवाई का नतीजा Tayo Rolls के रेजोल्यूशन प्लान के भविष्य की दिशा तय करेगा। निवेशक JBVNL और रेजोल्यूशन प्रोफेशनल के बीच मतभेदों को सुलझाने में किसी भी प्रगति पर भी नजर रखेंगे। कंपनी की कंप्लायंस स्थिति, किसी भी फाइलिंग की संभावना, या अतिरिक्त छूट दिए जाने जैसे घटनाक्रम महत्वपूर्ण होंगे।
