Tata Steel ने उठाया बड़ा कदम! 50% से ज्यादा CO2 घटाने के लिए लाई नई टेक्नोलॉजी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Tata Steel ने उठाया बड़ा कदम! 50% से ज्यादा CO2 घटाने के लिए लाई नई टेक्नोलॉजी
Overview

Tata Steel ने अपने जमशेदपुर प्लांट में नई EASyMelt टेक्नोलॉजी को अपनाने का ऐलान किया है। इस कदम से कंपनी कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) एमिशन को **50%** से भी ज्यादा घटाने का लक्ष्य रखती है, जो कि 2045 तक नेट-जीरो एमिशन हासिल करने की दिशा में एक बड़ा माइलस्टोन है।

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Tata Steel अपने जमशेदपुर 'E' ब्लास्ट फर्नेस में एक बड़े टेक्नोलॉजी अपग्रेड के ज़रिए कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) एमिशन को 50% से भी अधिक कम करने की तैयारी में है।

कंपनी ने SMS Group (जिसमें Paul Wurth भी शामिल है) के साथ दुनिया की पहली EASyMelt टेक्नोलॉजी को डिप्लॉय करने के लिए एग्रीमेंट साइन किए हैं। इसे जमशेदपुर वर्क्स के 'E' ब्लास्ट फर्नेस में लगाया जाएगा, जिसका मुख्य मकसद फर्नेस से होने वाले CO2 एमिशन को उसके मौजूदा स्तर से 50% से ज़्यादा घटाना है।

यह प्रोजेक्ट Tata Steel की सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) के प्रति प्रतिबद्धता और 2045 तक नेट-जीरो एमिशन (Net-Zero Emission) हासिल करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के लिए एक अहम कदम है। EASyMelt टेक्नोलॉजी को अपनाना लो-कार्बन स्टील प्रोडक्शन (Low-Carbon Steel Production) की ओर एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम है, जो मौजूदा साइट्स पर भविष्य की डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonisation) कोशिशों का समर्थन करेगा।

Tata Steel लंबे समय से सस्टेनेबिलिटी पर फोकस कर रही है और उसने 2045 तक नेट-जीरो एमिशन का टारगेट सेट किया है। कंपनी भारी उद्योगों में डीकार्बोनाइजेशन पर काम करने के लिए लीड ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन (LeadIT) जैसी पहलों में भी भाग लेती है। इसके अलावा, कंपनी हाइड्रोजन-आधारित स्टीलमेकिंग और एडवांस्ड स्मेलटिंग मेथड्स जैसी डीप डीकार्बोनाइजेशन टेक्नोलॉजीज पर भी सक्रिय रूप से रिसर्च और निवेश कर रही है।

शेयरहोल्डर्स (Shareholders) के लिए यह एक अहम खबर है, क्योंकि Tata Steel सस्टेनेबिलिटी के साथ-साथ एनवायर्नमेंटल, सोशल और गवर्नेंस (ESG) परफॉरमेंस पर ज़्यादा फोकस कर रही है। EASyMelt जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का डिप्लॉयमेंट एमिशन कम करने के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिससे ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) और लॉन्ग-टर्म वैल्यू में सुधार की उम्मीद है। यह प्रोजेक्ट भारतीय स्टील इंडस्ट्री में नए डीकार्बोनाइजेशन सॉल्यूशंस को लागू करने में Tata Steel को एक लीडर के तौर पर स्थापित करता है और कंपनी के लोअर-कार्बन फ्यूचर की ओर बढ़ते रणनीतिक लक्ष्य का समर्थन करता है।

हालांकि, कंपनी का कहना है कि EASyMelt टेक्नोलॉजी के वास्तविक नतीजे अनुमानों से भिन्न हो सकते हैं। इकोनॉमिक कंडिशंस, डिमांड-सप्लाई में बदलाव और बदलते एनवायर्नमेंटल रेगुलेशंस जैसे कारक नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।

इंडस्ट्री की बात करें तो JSW Steel और SAIL जैसी बड़ी कंपनियां भी एनर्जी एफिशिएंसी, ग्रीन हाइड्रोजन और नई स्टीलमेकिंग मेथड्स के ज़रिए डीकार्बोनाइजेशन की राह पर हैं। ArcelorMittal का लक्ष्य 2050 तक नेट-जीरो हासिल करना है। Tata Steel का EASyMelt प्रोजेक्ट इस ग्रीन स्टील प्रोडक्शन की इंडस्ट्री-वाइड ट्रेंड के अनुरूप है।

बता दें कि जमशेदपुर वर्क्स के 'E' ब्लास्ट फर्नेस की कैपेसिटी 649 m³ है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.