Tata Steel ने हाल ही में Hindustan Zinc के साथ अपने सहयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। कंपनी अपने गैल्वेनाइज्ड स्टील (galvanised steel) के उत्पादन में Hindustan Zinc द्वारा विकसित 'EcoZen' नामक लो-कार्बन जिंक (low-carbon zinc) सॉल्यूशन को एकीकृत (integrate) करने जा रही है। यह कदम Tata Steel की पर्यावरण के अनुकूल (eco-friendly) स्टील बनाने की राह में एक अहम पड़ाव है।
इस साझेदारी को लेकर Tata Steel ने यह भी साफ किया है कि यह SEBI लिस्टिंग रेगुलेशंस (SEBI Listing Regulations) के तहत किसी भी तरह की अनिवार्य खुलासे (mandatory disclosure) की आवश्यकता वाली घटना नहीं है। इसका मतलब है कि कंपनी इसे एक सामान्य ऑपरेशनल अपग्रेड मान रही है, न कि कोई बड़ी खबर जिसके लिए तत्काल सार्वजनिक घोषणा जरूरी हो।
यह पहल Tata Steel के लंबे समय से चले आ रहे सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों (sustainability goals) और पर्यावरण पर कम प्रभाव डालने वाले स्टील उत्पादन (low-carbon steelmaking) में अग्रणी बनने की उसकी महत्वाकांक्षा को दर्शाती है। EcoZen, जिसे Hindustan Zinc ने रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) का उपयोग करके बनाया है, का कार्बन फुटप्रिंट वैश्विक औसत से काफी कम है। इसका उद्देश्य गैल्वेनाइजिंग स्टील जैसे डाउनस्ट्रीम एप्लिकेशन्स में CO2 उत्सर्जन को कम करना है।
निवेशकों के लिए, यह साझेदारी स्टील सेक्टर में एनवायरनमेंटल, सोशल, एंड गवर्नेंस (ESG) फैक्टर्स के बढ़ते महत्व को उजागर करती है। हालांकि इसका तत्काल वित्तीय लाभ स्पष्ट नहीं है, लेकिन ऐसी पहलें कंपनी की ब्रांड इमेज को मजबूत कर सकती हैं और उन निवेशकों को आकर्षित कर सकती हैं जो ESG-फ्रेंडली कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, Tata Steel का Q3 FY26 में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (consolidated revenue) ₹57,002 करोड़ था, वहीं Hindustan Zinc ने इसी अवधि में ₹10,980 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया था। इस बीच, भारतीय स्टील उद्योग पर डीकार्बोनाइजेशन (decarbonisation) का दबाव बढ़ रहा है, खासकर EU के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे नियमों के कारण। इसी क्रम में JSW Steel और Jindal Steel & Power जैसी अन्य प्रमुख कंपनियां भी हाइड्रोजन-आधारित स्टीलमेकिंग और ग्रीन एनर्जी में निवेश कर रही हैं।
EcoZen की खासियत यह है कि इसका कार्बन फुटप्रिंट प्रति टन जिंक 1 टन CO2e से भी कम है, जो कि वैश्विक औसत से करीब 75% कम है। इसके इस्तेमाल से प्रति टन गैल्वेनाइज्ड स्टील में लगभग 400 किलोग्राम CO2 उत्सर्जन को रोका जा सकता है।
