Tata Steel ने TP Adarsh Limited (TPAL) में 26% इक्विटी स्टेक का अधिग्रहण पूरा कर लिया है। यह डील ₹5.90 करोड़ में हुई, जिसके तहत 59,00,000 शेयर्स का लेन-देन हुआ। इस निवेश के साथ, TPAL अब Tata Steel की अप्रत्यक्ष एसोसिएट कंपनी बन गई है, जो कंपनी के डीकार्बोनाइजेशन (decarbonization) लक्ष्यों को मजबूत करेगा।
TPAL, Tata Power Renewable Energy Limited (TPREL) की सब्सिडियरी है। इस अधिग्रहण से Tata Steel को ग्रीन एनर्जी (green energy) की ओर अपने झुकाव को और बढ़ाने में मदद मिलेगी।
स्ट्रेटेजिक (Strategic) महत्व
यह निवेश Tata Steel के रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) पर बढ़ते फोकस और इंडस्ट्रियल सेक्टर (industrial sector) में डीकार्बोनाइजेशन के प्रयासों को दर्शाता है। यह ग्रीन एनर्जी के लिए एसोसिएट कंपनियों का इस्तेमाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो स्टील मेकर के सस्टेनेबिलिटी (sustainability) लक्ष्यों के लिए बेहद जरूरी है।
Tata Steel का लक्ष्य
Tata Steel, जो दुनिया की लीडिंग स्टील मैन्युफैक्चरर (leading steel manufacturer) में से एक है, अपने कार्बन फुटप्रिंट (carbon footprint) को कम करने की स्पष्ट स्ट्रेटेजी पर काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य FY30 तक अपनी 25% एनर्जी की जरूरतें ग्रीन सोर्स (green sources) से पूरी करना है। इसके लिए वह ब्लास्ट फर्नेस (blast furnaces) में हाइड्रोजन इंजेक्शन (hydrogen injection) और सोलर व विंड एनर्जी (solar and wind energy) के इस्तेमाल जैसे विकल्पों पर सक्रिय रूप से काम कर रही है।
इंडस्ट्री (Industry) में भी यही ट्रेंड
इस क्षेत्र में Tata Steel अकेली नहीं है। JSW Steel जैसी अन्य बड़ी स्टील कंपनियां भी ग्रीन हाइड्रोजन (green hydrogen) जैसी ग्रीन टेक्नोलॉजी (green technologies) में निवेश कर रही हैं। Tata ग्रुप के भीतर, Tata Motors भी इसी तरह Tata Power की रिन्यूएबल एनर्जी सब्सिडियरी में हिस्सेदारी खरीद रहा है। यह ग्रुप-व्यापी रणनीति (group-wide strategic push) क्लीन एनर्जी अपनाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने पर जोर दे रही है।
