टाटा पावर का ₹6,500 करोड़ का मेगा इन्वेस्टमेंट
टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड (TPREL) ने भारतीय सौर ऊर्जा क्षेत्र में अपनी स्थिति को और मजबूत करने के लिए एक बड़ी योजना का ऐलान किया है। कंपनी ₹6,500 करोड़ का भारी-भरकम निवेश करके 10 गीगावाट (GW) की सोलर फोटोवोल्टेइक (PV) इंगोट और वेफर बनाने की क्षमता स्थापित करेगी। TPREL का अनुमान है कि इस महत्वपूर्ण अपस्ट्रीम सोलर मैन्युफैक्चरिंग वेंचर में किया गया यह निवेश लगभग 5 सालों में अपना पूरा रिटर्न (payback) दे देगा।
बैकवर्ड इंटीग्रेशन और आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य
यह कदम टाटा पावर के लिए सोलर वैल्यू चेन में बैकवर्ड इंटीग्रेशन हासिल करने और खासकर चीन जैसे देशों से आयात पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक चाल है। इससे कंपनी न केवल अपनी सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित बना सकेगी, बल्कि लागत पर बेहतर नियंत्रण भी हासिल करेगी।
'आत्मनिर्भर भारत' को बढ़ावा
भारत सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत, यह निवेश देश के सौर ऊर्जा मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को ज़बरदस्त बढ़ावा देगा। TPREL अब सेल और मॉड्यूल के उत्पादन से आगे बढ़कर, सौर ऊर्जा की बुनियाद माने जाने वाले शुरुआती कंपोनेंट्स के निर्माण में भी कदम रख रही है।
टाटा पावर का बढ़ता सोलर फुटप्रिंट
यह बड़ा कदम टाटा पावर के सौर ऊर्जा में बढ़ते प्रभुत्व का हिस्सा है। इसकी सहायक कंपनी TP Solar ने सितंबर 2024 में ही तमिलनाडु में 4.3 GW की सोलर सेल प्लांट शुरू की थी। कंपनी की फाइनेंशियल ईयर (FY) 2030 तक 30 GW की कुल सौर क्षमता हासिल करने की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके लिए वह FY30 तक ₹1.25 ट्रिलियन का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) करने वाली है।
प्रतिस्पर्धी भी मैदान में
हालांकि, इस क्षेत्र में टाटा पावर अकेली बड़ी खिलाड़ी नहीं है। वारी एनर्जीज़ (Waaree Energies) भी नागपुर में लगभग ₹6,200 करोड़ के निवेश से 10 GW की इंटीग्रेटेड इंगोट और वेफर फैसिलिटी का निर्माण कर रही है। इसी कड़ी में अडानी सोलर (Adani Solar) और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ (Reliance Industries) जैसी दिग्गज कंपनियां भी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। यह सब मिलकर भारत में एक पूर्ण और मजबूत घरेलू सोलर सप्लाई चेन बनाने की दिशा में एक अहम ट्रेंड को दर्शाता है।
