Supreme Infrastructure India Limited ने हाल ही में Q3 FY25-26 के नतीजे पेश किए हैं, जिनमें ₹29.62 करोड़ का रेवेन्यू और ₹-49.21 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया गया है। ऐसे में, कंपनी के लिए 31 मार्च, 2026 को होने वाली बोर्ड मीटिंग काफी अहमियत रखती है।
वॉरंट कन्वर्जन पर बोर्ड का फोकस
इस मीटिंग का मुख्य एजेंडा बकाया वॉरंट्स को इक्विटी शेयरों में बदलना और उन्हें आवंटित करना है। इस कदम से कंपनी की कैपिटल स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव आ सकता है, क्योंकि यह आमतौर पर कैपिटल जुटाने या बैलेंस शीट को मजबूत करने का एक तरीका होता है।
वॉरंट कन्वर्जन से मौजूदा शेयरधारकों के शेयरों का प्रतिशत कम हो सकता है, जिसे डिल्यूशन कहते हैं। अगर प्रॉफिट उसी अनुपात में नहीं बढ़ता है, तो प्रति शेयर आय (EPS) पर भी असर पड़ सकता है।
कंपनी की पृष्ठभूमि और पिछली चुनौतियां
कंपनी, जो 1983 में स्थापित हुई थी, इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में सड़क, हाईवे और पुल जैसे प्रोजेक्ट्स में सक्रिय रही है। हालांकि, कंपनी का इतिहास वित्तीय पुनर्गठन से जुड़ा रहा है। पिछले साल कॉर्पोरेट गवर्नेंस की चिंताओं के चलते स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सहित कई बड़े निवेशकों के साथ प्रस्तावित प्रेफरेंशियल इश्यू को वापस लेना पड़ा था।
फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए ऑडिटर्स ने एक क्वालिफाइड ओपिनियन दी थी, जो लोन कन्फर्मेशन और ऑफ-बैलेंस शीट फाइनेंशियल लायबिलिटीज़ से जुडी थी। दिसंबर 2025 तक प्रमोटर्स की 34.68% हिस्सेदारी थी, जिसमें से 63.87% हिस्सेदारी प्लीज्ड (गिरवी रखी हुई) थी।
इसके अलावा, कंपनी को फरवरी 2026 में स्टॉक एक्सचेंजों से 71,037,388 इक्विटी शेयर की लिस्टिंग के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी।
संभावित बदलाव और जोखिम
इस कन्वर्जन को मंजूरी मिलने पर, कंपनी की कुल जारी इक्विटी शेयर कैपिटल बढ़ेगी, शेयरधारिता पैटर्न में बदलाव आएगा और संभवतः नई पूंजी का प्रवाह होगा।
निवेशकों को ऑडिटर की क्वालिफाइड ओपिनियन, प्रमोटर्स द्वारा गिरवी रखे गए शेयर्स की बड़ी मात्रा और पिछली गवर्नेंस संबंधी समस्याएं जैसे जोखिमों पर नजर रखनी चाहिए।
प्रतिस्पर्धी और वित्तीय स्थिति
Supreme Infrastructure India Ltd. का मुकाबला Ashoka Buildcon Ltd. और PNC Infratech Ltd. जैसी कंपनियों से है। बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, Ashoka Buildcon जैसी कंपनियां अभी 'Undervalued' मानी जा रही हैं।
Q3 FY25-26 (दिसंबर 2025 तक) में कंपनी का रेवेन्यू ₹29.62 करोड़ और नेट लॉस ₹-49.21 करोड़ रहा। वहीं, पूरे फाइनेंशियल ईयर FY25 में कंपनी का रेवेन्यू ₹834 मिलियन और नेट लॉस ₹-14,264 मिलियन था।
आगे क्या देखें?
आगे चलकर, निवेशकों को 31 मार्च, 2026 को होने वाली बोर्ड मीटिंग के नतीजों, जारी किए जाने वाले शेयरों की संख्या, कन्वर्जन से मिलने वाली कुल राशि और शेयरधारिता पर इसके असर पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
