SEBI ने 'लार्ज कॉर्पोरेट' की यह परिभाषा इसलिए तय की है ताकि बड़ी कंपनियां डेट कैपिटल मार्केट में ज्यादा सक्रिय हों। अप्रैल 2024 से इसके नियमों में बड़े बदलाव किए गए थे, जिसमें थ्रेशोल्ड (threshold) काफी बढ़ा दिए गए। Sundaram Multi Pap जैसी कंपनियां, जिनका उधार इन तय सीमाओं से काफी कम है, उन्हें कुछ खास रेगुलेशन (regulation) से एग्जेंप्शन (exemption) मिल जाता है।
इस 'लार्ज कॉर्पोरेट' कैटेगरी में न आने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कंपनी पर बॉन्ड मार्केट के जरिए कर्ज जारी करने (mandatory debt issuance) का कोई दबाव नहीं होगा। इससे कंपनी को अपनी फंड रेजिंग (fundraising) स्ट्रेटेजी में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी (flexibility) मिलती है और उसे बड़ी कंपनियों के लिए बने कड़े डिस्क्लोजर (disclosure) और इश्यूअंस (issuance) नियमों का पालन नहीं करना पड़ता।
यह कोई अकेला मामला नहीं है। हाल ही में Super Sales India Ltd., Ashiana Housing Ltd., और Palco Metals Ltd. जैसी कई लिस्टेड कंपनियों ने भी पुष्टि की है कि उनका उधार SEBI द्वारा तय लिमिट से कम है, इसलिए वे भी 'लार्ज कॉर्पोरेट' नहीं मानी जाएंगी।
अब निवेशक Sundaram Multi Pap के भविष्य के कर्ज स्तरों और फंड रेजिंग की योजनाओं पर नजर रखेंगे। साथ ही, कंपनी के मुख्य पेपर स्टेशनरी बिजनेस के परफॉरमेंस (performance) पर भी ध्यान बना रहेगा।