प्रोडक्शन कैपेसिटी में बड़ी उछाल
Stylam Industries नए मैनक टाबरा प्लांट के ज़रिए अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी को लगभग दोगुना करने की तैयारी में है। यह ₹334 करोड़ का प्लांट जल्द ही चालू होने वाला है और अगले फाइनेंशियल ईयर (FY27) में ₹300-400 करोड़ का रेवेन्यू उत्पन्न करेगा। कंपनी के मैनेजमेंट ने बताया कि इस नए प्लांट के लिए फिक्स्ड कॉस्ट और मैनपावर का खर्च मौजूदा खर्चों में ही मैनेज किया जा रहा है। प्लांट में मशीनों की टेस्टिंग का काम अंतिम चरण में है।
Aica के साथ स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप और मार्जिन का लक्ष्य
कंपनी जापान की Aica Kogyo के साथ एक स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप पर आगे बढ़ रही है। इस कोलैबोरेशन का मकसद हाई-प्रेशर लैमिनेट (HPL) की एडवांस्ड पेटेंट टेक्नोलॉजी तक पहुंच बनाना है, जिससे Stylam के प्रोडक्ट्स और मार्केट कॉम्पिटिटिवनेस को बूस्ट मिलेगा। कंपनी ने FY28 तक 22% EBITDA मार्जिन हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जो इस बढ़ी हुई कैपेसिटी और टेक्नोलॉजिकल एडवांसेज का फायदा उठाने में मदद करेगा।
पर्यावरण मंजूरी में 6 महीने की देरी
हालांकि, नए प्लांट के चालू होने में लगभग 6 महीने की देरी हुई है। यह देरी मुख्य रूप से हरियाणा में पर्यावरण मंजूरी से जुड़े बदलते नियमों के कारण हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी के चलते प्रोजेक्ट की टाइमलाइन प्रभावित हुई। इन चुनौतियों के बावजूद, कंपनी ने कच्चे माल की बढ़ती कीमतों को ग्राहकों पर 3-5% की प्राइस इंक्रीज़ के ज़रिए ट्रांसफर करने में कामयाबी पाई है।
Aica डील और प्रमोटर्स की हिस्सेदारी
Aica के साथ हुए समझौते के तहत, Stylam के प्रमोटर्स को 40% अपनी हिस्सेदारी टेंडर करनी होगी, जो कि ओपन ऑफर की प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगा।
कॉम्पिटिटर्स के मुकाबले Stylam की रणनीति
अपनी कैपेसिटी को बढ़ाने के साथ Stylam अब Century Plyboards (जिसकी डोमेस्टिक मार्केट में सबसे ज़्यादा कैपेसिटी है) और Greenlam Industries (जो ग्लोबल फुटप्रिंट के लिए जानी जाती है) जैसे बड़े प्लेयर्स के साथ सीधे मुकाबले में आ गई है। Stylam का लक्ष्य अपनी प्रोडक्शन को दोगुना करके और Aica अलायंस से मिलने वाले टेक्नोलॉजिकल एज का फायदा उठाकर मार्केट शेयर हासिल करना है, साथ ही अपने एक्सपोर्ट स्ट्रेंथ्स को भी मजबूत करना है।
आगे क्या देखना होगा
निवेशकों को कुछ अहम बातों पर नज़र रखनी होगी। हरियाणा में रेगुलेटरी अप्रूवल में देरी का जोखिम या भविष्य की मंजूरी पर इसका असर एक चिंता का विषय बना हुआ है। क्रूड ऑयल-लिंक्ड केमिकल्स और बढ़ते ओशन फ्रेट जैसी इनपुट कॉस्ट में उतार-चढ़ाव मार्जिन पर दबाव डाल सकता है। इसके अलावा, Aica डील के ओपन ऑफर का नतीजा प्रमोटर की हिस्सेदारी में कितनी कमी आएगी, यह तय करेगा। कंपनी के लिए अब मैनक टाबरा प्लांट की आधिकारिक कमीशनिंग डेट और प्रोडक्शन की स्पीड पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, Aica ग्लोबल डील का फाइनल होना और उसके बाद ओपन ऑफर प्रोसेस की प्रगति भी अहम है। निवेशक FY27 के लिए असली रेवेन्यू और वॉल्यूम ग्रोथ, लागत में उतार-चढ़ाव के बीच कंपनी की प्राइसिंग पावर बनाए रखने की क्षमता और FY28 तक 22% EBITDA मार्जिन के लक्ष्य की ओर प्रगति पर भी नज़र रखेंगे।