Steel Exchange India Ltd ने हाल ही में ₹75 करोड़ जुटाने के लिए एक अहम डील फाइनल की है। कंपनी ने दो नॉन-प्रमोटर एंटिटीज को 31.74 करोड़ से अधिक कन्वर्टिबल इक्विटी वारंट्स अलॉट किए हैं। इस डील के ज़रिए कंपनी को तुरंत ₹74.99 करोड़ का अपफ्रंट पेमेंट मिला है, जो कुल सब्सक्रिप्शन अमाउंट का 25% है।
इन वारंट्स का इश्यू प्राइस ₹9.45 प्रति वारंट तय किया गया है। यह कीमत इक्विटी शेयर के ₹1 फेस वैल्यू पर ₹8.45 का प्रीमियम दर्शाता है। सबसे अहम बात यह है कि इन वारंट्स को अलॉटमेंट डेट से 18 महीने के अंदर इक्विटी शेयर्स में कन्वर्ट किया जा सकता है।
यह पूंजी कंपनी को वर्किंग कैपिटल या ऑपरेशनल एक्सपेंशन के लिए ज़रूरी फंड्स मुहैया कराएगी। लेकिन, असल कहानी तो तब शुरू होती है जब ये वारंट्स इक्विटी में बदले जाते हैं। अगर वारंट होल्डर्स अगले 18 महीनों में बाकी 75% पेमेंट कर देते हैं, तो कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों के लिए डाइल्यूशन का बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा, यानी उनके शेयरों की हिस्सेदारी कम हो जाएगी।
कंपनी ने इस डील को फाइनल करने से पहले सभी ज़रूरी मंज़ूरियां भी हासिल कर ली थीं। 30 मार्च 2026 को शेयरधारकों की मंज़ूरी मिली, जबकि स्टॉक एक्सचेंजों से 17 अप्रैल 2026 को इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिल गया था।
यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि Steel Exchange India मुख्य रूप से स्टील ट्रेडिंग और डिस्ट्रीब्यूशन के कारोबार में है। यह JSW Steel, Tata Steel और SAIL जैसी बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों से अलग है।
