Skipper Ltd के FY26 के नतीजे: रेवेन्यू और प्रॉफिट दोनों में रिकॉर्ड
Skipper Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के लिए अपने अब तक के सबसे मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने पूरे साल में ₹5,552.8 करोड़ का रिकॉर्ड रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल की तुलना में 20% की ग्रोथ दिखाता है। वहीं, नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 42% की भारी बढ़ोतरी हुई है, जो ₹207.3 करोड़ रहा। कंपनी के इंजीनियरिंग सेगमेंट और पॉलीमर बिजनेस ने इस शानदार परफॉर्मेंस में अहम भूमिका निभाई है।
तिमाही नतीजों में भी दिखी मजबूती
FY26 की चौथी तिमाही में भी कंपनी ने ₹1,666 करोड़ के रिकॉर्ड रेवेन्यू के साथ मजबूत प्रदर्शन किया। पूरे साल के लिए EBITDA मार्जिन सुधरकर 10.3% पर पहुंच गया। कंपनी ने साल का अंत ₹8,501.9 करोड़ की रिकॉर्ड ऑर्डर बुक और ₹33,000 करोड़ की एक बड़ी बिडिंग पाइपलाइन के साथ किया है। Skipper ने 'टेस्ट बेड 2' (Test Bed 2) को भी चालू किया है, जिससे यह दुनिया की ऐसी चुनिंदा कंपनियों में शामिल हो गई है जिसके पास एक ही लोकेशन पर दो टेस्ट बेड फैसिलिटी हैं।
इंजीनियरिंग और पॉलीमर सेगमेंट की ग्रोथ
Skipper का इंजीनियरिंग सेगमेंट, जो कंपनी का मुख्य ग्रोथ इंजन है, में पिछले साल के मुकाबले 24% की बढ़ोतरी देखी गई। वहीं, पॉलीमर सेगमेंट का रेवेन्यू ₹500 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया। कंपनी ने यह भी बताया कि ट्रेड रिसीवेबल्स (Trade Receivables) बढ़कर ₹1,485 करोड़ हो गए थे, हालांकि इसमें से ₹260 करोड़ तिमाही खत्म होने के तुरंत बाद मिल गए थे।
FY27 के लिए सतर्क आउटलुक, पर क्षमता विस्तार की योजना
Skipper का मैनेजमेंट FY27 को लेकर थोड़ा सतर्क दिख रहा है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतें जैसी बाहरी चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके बावजूद, कंपनी FY27 में ₹250 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) करने की योजना बना रही है। इसका मकसद जून 2026 तक प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ाकर 4.5 लाख टन करना है, और FY28 तक इसे 6 लाख टन तक ले जाने का लॉन्ग-टर्म लक्ष्य है। कंपनी का लक्ष्य लॉन्ग-टर्म में EBITDA मार्जिन को 12% तक पहुंचाना है।
भविष्य की राह और चुनौतियां
Skipper Transmission Towers की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी लगातार बढ़ा रही है। कंपनी ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्लाइंट्स से बड़े ऑर्डर हासिल करने का ट्रैक रिकॉर्ड बनाया है। वहीं, 'टेस्ट बेड 2' में निवेश टेक्नोलॉजी और क्वालिटी को लेकर कंपनी की प्रतिबद्धता दिखाता है।
हालांकि, कुछ संभावित जोखिम भी हैं, जैसे कि राइट-ऑफ-वे (Right-of-Way) और फॉरेस्ट क्लीयरेंस से जुड़े प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन में देरी। ट्रांसफॉर्मर और HVDC कंपोनेंट्स की ग्लोबल सप्लाई चेन में दिक्कतें प्रोजेक्ट्स को धीमा कर सकती हैं। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ते समुद्री माल भाड़े (Sea Freight Costs) भी अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर पूरा करने की गति को प्रभावित कर सकते हैं। ट्रेड रिसीवेबल्स का बढ़ना वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट के लिए एक अहम बिंदु रहेगा।
कॉम्पिटिशन और निवेशक क्या देखें
Skipper का इंजीनियरिंग सेगमेंट KEC International और Kalpataru Power Transmission Ltd (KPTL) जैसे बड़े प्लेयर्स के साथ प्रतिस्पर्धा करता है। FY26 में Skipper का रेवेन्यू ₹5,552.8 करोड़ था, जबकि KEC International और KPTL का FY24 का रेवेन्यू क्रमशः ₹17,021 करोड़ और ₹20,801 करोड़ था। Skipper की ₹8,501.9 करोड़ की ऑर्डर बुक भी इन बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटी है।
निवेशकों की नजर Skipper की ₹33,000 करोड़ की बिडिंग पाइपलाइन के कन्वर्जन रेट पर रहेगी। साथ ही, FY27 के रेवेन्यू और PAT ग्रोथ टारगेट हासिल करने, कैपिटल एक्सपेंडिचर का इस्तेमाल और पॉलीमर सेगमेंट के मार्जिन में सुधार जैसे फैक्टर महत्वपूर्ण होंगे।
