क्यों उठाया गया ये कदम?
Shri Krishna Devcon Limited ने 1 अप्रैल, 2026 से अपने 'ट्रेडिंग विंडो' को बंद कर दिया है। यह एक स्टैंडर्ड कॉर्पोरेट गवर्नेंस प्रैक्टिस है, जिसका मकसद SEBI के इनसाइडर ट्रेडिंग रेगुलेशन्स का पालन करना है। इसके तहत, कंपनी की उन सिक्योरिटीज में किसी भी तरह के ट्रेड को रोका जाता है, जब तक कि 31 मार्च, 2026 को खत्म हो रहे फाइनेंशियल ईयर के नतीजों की घोषणा के 48 घंटे बाद तक। इस अवधि में ट्रेड पर रोक लगाकर, कंपनी पारदर्शिता बनाए रखती है और इन्वेस्टर्स के हितों की रक्षा करती है।
ट्रेडिंग पर क्या हैं पाबंदियां?
इस विंडो क्लोजर के दौरान, कंपनी के प्रमोटर्स, डायरेक्टर्स, की मैनेजेरियल पर्सनेल, एम्प्लॉईज़ और उनके इमीडिएट रिलेटिव्स जैसे डेजिग्नेटेड पर्सन्स कंपनी की सिक्योरिटीज को खरीदने, बेचने या सब्सक्राइब करने से प्रोहिबिटेड होंगे। यह कदम फाइनेंशियल नतीजों से जुड़ी किसी भी अनपब्लिश्ड, प्राइस-सेंसिटिव इन्फॉर्मेशन के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है।
कंपनी की पृष्ठभूमि
1993 में स्थापित Shri Krishna Devcon Limited, भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में एक जाना-माना नाम है। यह मुख्य रूप से प्रॉपर्टी कंस्ट्रक्शन और डेवलपमेंट का काम करती है, और इसका बिजनेस मुंबई तक फैला हुआ है। कंपनी ने 2007 में एक एक्विजिशन के बाद फाइनेंस सेक्टर से रियल एस्टेट में रणनीतिक बदलाव किया था। इसके प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो में टाउनशिप, हाउसिंग और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स शामिल हैं।
इंडस्ट्री में यह आम बात है
ट्रेडिंग विंडो को बंद करना लगभग सभी पब्लिकली लिस्टेड भारतीय कंपनियों के लिए एक रूटीन प्रैक्टिस है, खासकर जब वे फाइनेंशियल रिजल्ट्स की घोषणा के करीब होती हैं। DLF Ltd., Godrej Properties Ltd. और Brigade Enterprises Ltd. जैसी बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां भी SEBI के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत इस प्रोटोकॉल का पालन करती हैं।
आगे क्या देखें?
स्टेकहोल्डर्स अब FY26 के फाइनेंशियल नतीजों को मंजूरी देने के लिए बोर्ड मीटिंग की तारीख की घोषणा का इंतजार करेंगे। नतीजों के आधिकारिक तौर पर डिक्लेअर होने के 48 घंटे बाद ट्रेडिंग एक्टिविटीज सामान्य रूप से फिर से शुरू होने की उम्मीद है।
