SEBI के 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क से बाहर Shreeshay Engineers
Shreeshay Engineers Ltd ने 16 अप्रैल, 2026 को यह जानकारी देते हुए बताया कि कंपनी 'लार्ज कॉर्पोरेट' (LC) के तौर पर वर्गीकृत होने के लिए जरूरी शर्तों को पूरा नहीं करती है। इसका मतलब है कि कंपनी को SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) द्वारा तय किए गए अतिरिक्त पीरियोडिक डिस्क्लोजर की जिम्मेदारियों से राहत मिल गई है, खासकर फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए।
SEBI ने 'लार्ज कॉर्पोरेट' कंपनियों के लिए कुछ खास डिस्क्लोजर नियम लागू किए थे। शुरुआत में, यह नियम उन कंपनियों के लिए था जिनके ₹100 करोड़ या उससे अधिक के लॉन्ग-टर्म बॉरोइंग (borrowing) थे और क्रेडिट रेटिंग 'AA' या उससे ऊपर थी।
हालांकि, SEBI ने 31 मई, 2024 को इन नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए। नए नियमों के तहत, 'लार्ज कॉर्पोरेट' की परिभाषा को संशोधित कर ₹1000 करोड़ या उससे अधिक के आउटस्टैंडिंग लॉन्ग-टर्म बॉरोइंग वाली कंपनियों तक सीमित कर दिया गया है। Shreeshay Engineers इन संशोधित थ्रेशोल्ड (threshold) के दायरे में नहीं आती है।
इस स्थिति के कारण, निवेशकों को Shreeshay Engineers से स्टैंडर्ड रिपोर्टिंग की ही उम्मीद रखनी चाहिए, न कि 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क के तहत अनिवार्य विशेष तिमाही या वार्षिक रिपोर्ट की। कंपनी की फाइलिंग में इस क्लासिफिकेशन (classification) से जुड़े किसी खास जोखिम का जिक्र नहीं किया गया है।
