Shree Krishna Paper Mills & Industries Ltd. ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को औपचारिक रूप से सूचित कर दिया है कि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रहे फाइनेंशियल ईयर के लिए इसे 'लार्ज कॉर्पोरेट' के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया जाएगा।
यह फैसला कंपनी को सेबी (SEBI) के 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क के तहत आने वाले शुरुआती डिस्क्लोजर (disclosure) दायित्वों से मुक्त करता है, खासकर जब कंपनी डेट इंस्ट्रूमेंट्स (debt instruments) के जरिए फंड जुटाना चाहेगी। आमतौर पर, ये नियम कंपनियों के फाइनेंशियल मैट्रिक्स जैसे मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) या नेट वर्थ (net worth) के आधार पर लागू होते हैं।
इसका सीधा मतलब यह है कि Shree Krishna Paper Mills अब डेट जारी करने की प्रक्रिया को आसान बना सकेगी। इससे कैपिटल मार्केट्स (capital markets) और अपने फाइनेंशियल ऑपरेशंस (financial operations) तक पहुंचने में उसे कम बाधाओं का सामना करना पड़ेगा और अपनी कैपिटल-रेजिंग स्ट्रैटेजी (capital-raising strategy) को लेकर रेगुलेटरी स्पष्टता (regulatory clarity) मिलेगी।
यह ध्यान देने वाली बात है कि कंपनी का एक इतिहास रहा है जब इसे 2014-2015 के आसपास भारी घाटे के कारण बोर्ड फॉर इंडस्ट्रियल एंड फाइनेंशियल रिकंस्ट्रक्शन (BIFR) के पास भेजा गया था, क्योंकि इसका नेट वर्थ काफी कम हो गया था।
हालांकि, Shree Krishna Paper Mills ने 31 मार्च 2015 तक अपने नेट वर्थ को पॉजिटिव (positive) करने में कामयाबी हासिल की थी। तब से, कंपनी लगातार रेगुलेटरी फाइलिंग्स (regulatory filings) का पालन कर रही है, जिसमें BSE को अनिवार्य क्वार्टरली कंप्लायंस सर्टिफिकेट (quarterly compliance certificates) जमा करना भी शामिल है।
