SEBI के नियमों के तहत मिली बड़ी रियायत
SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) LODR Regulations के तहत, Shivamshree Businesses Ltd को एक बड़ी राहत मिली है। कंपनी अब वित्तीय वर्ष 2026 (जो 31 मार्च, 2026 को समाप्त हो रहा है) के लिए अपनी एनुअल सेक्रेटेरियल कंप्लायंस रिपोर्ट फाइल करने के लिए बाध्य नहीं होगी।
क्यों मिली छूट?
इस छूट का मुख्य कारण कंपनी की वित्तीय स्थिति है। SEBI LODR Regulations के Regulation 15(2) के अनुसार, यदि किसी कंपनी की पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल (Paid-up Equity Share Capital) और नेट वर्थ (Net Worth) एक निश्चित सीमा से कम है, तो उसे यह छूट मिल सकती है। Shivamshree Businesses Ltd की 31 मार्च, 2025 तक की पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल ₹4.57 करोड़ और नेट वर्थ ₹3.65 करोड़ रही है, जो कि निर्धारित सीमा से काफी कम है।
इस कंप्लायंस (Compliance) के बोझ से मुक्ति मिलने से कंपनी का समय, संसाधन और प्रशासनिक प्रयास बचेगा।
कंपनी का सफर और भविष्य
साल 1983 में स्थापित हुई Shivamshree Businesses Ltd, जो पहले Siddarth Businesses Limited के नाम से जानी जाती थी, अब एक डायवर्सिफाइड (Diversified) कंपनी बन गई है। इसके कारोबार में सोलर प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग, FIBC बैग्स का निर्माण, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी (PMC) और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
हालांकि, कंपनी के विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों के कारण सीधे किसी बड़ी कंपनी से तुलना करना मुश्किल है, लेकिन Tata Power Solar और Waaree Energies जैसे नाम सोलर सेगमेंट में प्रमुख हैं।
निवेशकों को यह ट्रैक करना चाहिए कि भविष्य में Shivamshree की पेड-अप कैपिटल या नेट वर्थ SEBI LODR छूट की सीमा को पार करती है या नहीं। इसके अलावा, समान आकार की कंपनियों को प्रभावित करने वाले नियामक परिवर्तनों पर भी नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
