Shivam Autotech पर मंडराया ₹120 करोड़ का संकट! फंड इस्तेमाल में देरी, रीपेमेंट का डर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Shivam Autotech पर मंडराया ₹120 करोड़ का संकट! फंड इस्तेमाल में देरी, रीपेमेंट का डर
Overview

Shivam Autotech के निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। कंपनी ने **₹120 करोड़** का फंड ऑप्शनली कनवर्टिबल डिबेंचर्स (OCDs) के जरिए तो जुटा लिया है, लेकिन CARE Ratings की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन पैसों के इस्तेमाल में देरी हो रही है, जिससे कंपनी पर रीपेमेंट (Repayment) का खतरा मंडरा रहा है।

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फंड इस्तेमाल में देरी, क्या है वजह?

Shivam Autotech Limited ने 10 फरवरी से 12 फरवरी, 2026 के बीच ₹120 करोड़ का फंड ऑप्शनली कनवर्टिबल डिबेंचर्स (OCDs) के प्रीफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue) से जुटाया था। 31 मार्च, 2026 तक, कंपनी इन फंडों में से ₹105.15 करोड़ का ही इस्तेमाल कर पाई थी, यानी अभी भी ₹14.84 करोड़ का फंड इस्तेमाल होना बाकी है।

लगातार नेट लॉस का बोझ

यह स्थिति तब है जब Shivam Autotech लगातार नेट लॉस (Net Loss) की रिपोर्ट कर रही है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में कंपनी को ₹48.04 करोड़ का स्टैंडअलोन लॉस हुआ था। वहीं, 31 मार्च, 2026 को खत्म हुए नौ महीनों में भी कंपनी ₹33.28 करोड़ के लॉस में रही।

CARE Ratings की चेतावनी

रिपोर्टिंग एजेंसी CARE Ratings ने फंड इस्तेमाल में हो रही देरी को एक बड़ी चिंता बताया है। लगातार हो रहे नुकसान के साथ, यह देरी कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य और अपने डेट ऑब्लिगेशन्स (Debt Obligations) को पूरा करने की क्षमता पर सवाल खड़े करती है।

इसके अलावा, कंपनी पर ₹2.46 करोड़ का प्रस्तावित टैक्स डिमांड (Tax Demand) और ₹2.11 करोड़ का प्रस्तावित पेनाल्टी (Penalty) का भी बोझ है।

स्टॉक प्राइस और कन्वर्टिबल डिबेंचर्स का पेंच

एक और बड़ी चिंता की बात यह है कि Shivam Autotech का मौजूदा स्टॉक प्राइस (Stock Price) उसके OCDs के कन्वर्टिबल प्राइस (Conversion Price) से काफी नीचे चला गया है। 8 मई, 2026 तक, शेयर का भाव ₹19.58 पर था, जबकि OCD कन्वर्टिबल प्राइस ₹28.81 है। इस बड़े अंतर का मतलब है कि अगर निवेशक अपने डिबेंचर्स को कन्वर्ट नहीं करते हैं, तो कंपनी को सीधे ₹120 करोड़ का रीपेमेंट करना पड़ सकता है, जिससे कंपनी पर भारी वित्तीय दबाव आ जाएगा।

पिछली बार भी फंड मैनेजमेंट पर उठे सवाल

Shivam Autotech के लिए यह कोई नई बात नहीं है। कंपनी को FY17 से लगातार नेट लॉस हो रहा है। इससे पहले भी नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के आंशिक रीपेमेंट के लिए कंपनी ने पहले अपने फंड का इस्तेमाल किया, और फिर OCD प्रोसीड्स (Proceeds) से इसकी प्रतिपूर्ति की। इस पैटर्न ने कंपनी की फंड मैनेजमेंट स्ट्रेटेजी (Fund Management Strategy) पर सवाल खड़े किए हैं।

आगे क्या होगा?

निवेशक अब इस बात पर नजर रखेंगे कि मैनेजमेंट बाकी बचे ₹14.84 करोड़ के फंड का वर्किंग कैपिटल (Working Capital) के लिए कैसे इस्तेमाल करता है। कंपनी के लिए प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) की राह दिखाना और टैक्स डिमांड को सुलझाना, उसके वित्तीय ढांचे और स्टॉक वैल्यूएशन (Stock Valuation) को सुधारने के लिए बेहद जरूरी होगा।

सेक्टर की दूसरी कंपनियाँ

वहीं, ऑटो कंपोनेंट सेक्टर की अन्य कंपनियाँ जैसे Minda Corporation और Sharda Motor Industries आमतौर पर ग्रोथ और मार्जिन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करती हैं, और उनके वित्तीय मेट्रिक्स (Financial Metrics) आमतौर पर मजबूत होते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.