यह फंड्स मार्च 2024 में ही जुटाए गए थे, जिनका मुख्य मकसद कंपनी की प्रोडक्शन कैपेसिटी (capacity) का विस्तार करना था, जिसमें एक नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाना भी शामिल था। हालांकि, कंपनी की लेटेस्ट मॉनिटरिंग एजेंसी रिपोर्ट के अनुसार, अब तक केवल ₹95.65 करोड़ का ही इस्तेमाल हुआ है, जबकि ₹104.35 करोड़ अभी भी अप्रयुक्त (unutilized) हैं।
प्रोजेक्ट्स में हो रही देरी
इस देरी के कारण कंपनी के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पीछे चल रहे हैं। जमीन अधिग्रहण (land acquisition) का काम, जो मूल रूप से जून 2024 तक पूरा होना था, अब अगस्त 2025 तक खिंच गया है। वहीं, नई मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की कमीशनिंग (commissioning) की तारीख को भी दिसंबर 2025 से बदलकर जुलाई 2026 कर दिया गया है।
ग्रोथ पर असर की आशंका
Shakti Pumps के लिए यह क्षमता विस्तार (capacity expansion) बेहद ज़रूरी है ताकि बढ़ती डिमांड को पूरा किया जा सके और पंप्स, मोटर्स, इनवर्टर और VFDs जैसे प्रोडक्ट्स की प्रोडक्शन को दोगुना किया जा सके। इन प्रोजेक्ट्स में देरी से कंपनी की ग्रोथ (growth) और मार्केट में नए मौके भुनाने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।
निवेशकों की चिंता
लंबी खींची हुई टाइमलाइन और बड़े पैमाने पर अप्रयुक्त फंड्स से प्रोजेक्ट पर लागत बढ़ने (cost overruns) का जोखिम है और अनुमानित रिटर्न (returns) पर भी असर पड़ सकता है। कॉम्पिटिटिव पंप मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में, जहां Kirloskar Brothers Ltd. जैसे प्रतिद्वंद्वी भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, वहां Shakti Pumps के लिए अपनी एग्जीक्यूशन की रफ़्तार बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। निवेशक अब कंपनी द्वारा बताई गई नई समय-सीमाओं का पालन करने, बाकी फंड्स के इस्तेमाल और एग्जीक्यूशन की बाधाओं को दूर करने के मैनेजमेंट के प्लान पर बारीकी से नजर रखेंगे।
