शेयर बाज़ार के नियमों का पालन करने और नियामक ज़रूरतों को पूरा करने की दिशा में Sagar Cements Limited ने एक अहम कदम उठाया है। कंपनी ने अपनी सहयोगी Andhra Cements Limited में अपनी 7.24% हिस्सेदारी, यानी 66,76,843 इक्विटी शेयर्स बेच दिए हैं। यह बिक्री 17-18 मार्च, 2026 को स्टॉक एक्सचेंज मैकेनिज्म के ज़रिए पूरी हुई।
इस डिवेस्टमेंट (divestment) के कारण Andhra Cements में Sagar Cements की प्रमोटर होल्डिंग 58.49% से घटकर 51.25% हो गई है। इस कदम का सीधा उद्देश्य Andhra Cements को सेबी (SEBI) के मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियमों का पालन करने में मदद करना था।
क्यों ज़रूरी है MPS नियम?
SEBI के नियमों के अनुसार, किसी भी लिस्टेड कंपनी को अपनी कुल पेड-अप कैपिटल का कम से कम 25% पब्लिक के पास रखना अनिवार्य है। यह पब्लिक फ्लोट (public float) को बढ़ाता है, मार्केट में लिक्विडिटी (liquidity) को बेहतर बनाता है और मालिकाना हक़ के केंद्रीकरण को रोकता है। इस नियम का पालन न करने पर कंपनियों पर भारी जुर्माना या डीलिस्टिंग (delisting) जैसी कार्रवाई हो सकती है।
Andhra Cements का पिछला सफर:
Andhra Cements Limited का इतिहास वित्तीय और ऑपरेशनल चुनौतियों से भरा रहा है। कंपनी को कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजरना पड़ा था, जिसके चलते फरवरी 2020 से मार्च 2023 तक इसका सीमेंट प्रोडक्शन बंद रहा। इसके बाद, Sagar Cements Limited ने मार्च 2023 में अप्रूव्ड रेजोल्यूशन प्लान के तहत Andhra Cements में कंट्रोलिंग स्टेक (controlling stake) खरीदा था। तभी से, Sagar Cements MPS नियमों के अनुपालन के लिए अपनी हिस्सेदारी धीरे-धीरे कम कर रही है। इससे पहले भी फरवरी 2024 में 5% और जनवरी 2026 में 7.76% हिस्सेदारी बेची जा चुकी है।
इस बिक्री से Andhra Cements अब SEBI के MPS नियमों का पालन करने की स्थिति में आ गया है। प्रमोटर की हिस्सेदारी कम होने से पब्लिक फ्लोट बढ़ा है, जिससे शेयर की लिक्विडिटी बढ़ने की उम्मीद है।
