Sadbhav Engineering: कंपनी सेक्रेटरी ने दिया इस्तीफा, **1 अप्रैल 2026** से होंगे अलग

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AuthorNeha Patil|Published at:
Sadbhav Engineering: कंपनी सेक्रेटरी ने दिया इस्तीफा, **1 अप्रैल 2026** से होंगे अलग
Overview

Sadbhav Engineering Limited ने घोषणा की है कि कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर, मिस्टर हार्दिक मोदी, **1 अप्रैल 2026** से अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। कंपनी ने उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब Sadbhav Engineering अपने पिछले फाइनेंशियल रीस्ट्रक्चरिंग और रेगुलेटरी कंप्लायंस के मुद्दों को हल करने में लगी हुई है।

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गवर्नेंस में बड़ा बदलाव: कंपनी सेक्रेटरी दे रहे इस्तीफा

कंपनी के कॉर्पोरेट गवर्नेंस और रेगुलेटरी कंप्लायंस के लिए कंपनी सेक्रेटरी (Company Secretary) और कंप्लायंस ऑफिसर (Compliance Officer) का पद बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह सुनिश्चित करता है कि कंपनी सभी कानूनी और नियामक नियमों का पालन करे। Sadbhav Engineering Limited ने अब घोषणा की है कि इस अहम भूमिका में मिस्टर हार्दिक मोदी, 1 अप्रैल 2026 से अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। कंपनी ने उनके इस्तीफे को स्वीकार करते हुए उन्हें उनकी सेवाओं के लिए धन्यवाद भी कहा है।

कंपनी की चुनौतियों के बीच यह नियुक्ति क्यों है खास?

यह बदलाव ऐसे समय पर आया है जब Sadbhav Engineering, जो 1988 में स्थापित एक अहमदाबाद-आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है, अपने अतीत के फाइनेंशियल और रेगुलेटरी मुद्दों से निपट रही है। कंपनी सड़क, हाईवे, ब्रिज, माइनिंग और सिंचाई परियोजनाओं पर काम करती है।गौरतलब है कि कंपनी इससे पहले भी कई बड़े बदलावों से गुजरी है। नवंबर 2022 में इसके सीईओ (CEO) और सीएफओ (CFO) ने भी इस्तीफा दे दिया था। Sadbhav Engineering ने सेबी (SEBI) के बोर्ड कंपोजिशन नियमों का पालन न करने पर लगी पेनल्टी को भी चुकाया था, जिसे एक नए डायरेक्टर की नियुक्ति के बाद हल किया गया। इसके अलावा, कंपनी ने क्रेडिटर्स से आई इन्सॉल्वेंसी पिटीशन को भी सेटल किया है ताकि औपचारिक कार्यवाही से बचा जा सके।

क्या होंगे अगले कदम और क्या हैं जोखिम?

मिस्टर मोदी के जाने से कंपनी के वैधानिक और रेगुलेटरी फंक्शन्स को संभालने के लिए एक महत्वपूर्ण पद खाली हो जाएगा। Sadbhav Engineering को अब एक योग्य उत्तराधिकारी की तलाश और नियुक्ति करनी होगी। यदि नए कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर की नियुक्ति में कोई बड़ी देरी होती है, तो यह कंपनी के गवर्नेंस को लेकर चिंताएं बढ़ा सकता है, खासकर उसके बोर्ड कंप्लायंस के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए। यह भूमिका रेगुलेटरी फाइलिंग्स और नियामकों के साथ बातचीत के लिए आवश्यक है, जो नेतृत्व परिवर्तन के दौरान प्रभावित हो सकती है।

कंपनी की वित्तीय सेहत और रेटिंग

कंपनी के हालिया फाइनेंशियल परफॉर्मेंस की बात करें तो, दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तिमाही के लिए Sadbhav Engineering ने ₹72.63 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया था। इसी अवधि में सेल्स में भी साल-दर-साल गिरावट देखी गई। जुलाई 2021 में, इंडिया रेटिंग्स (India Ratings) ने कंपनी की स्ट्रेंड लिक्विडिटी और हाई वर्किंग कैपिटल रिक्वायरमेंट्स के कारण उसकी रेटिंग को डाउनग्रेड कर दिया था।

इंडस्ट्री में पहचान

Sadbhav Engineering भारत के प्रतिस्पर्धी इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में काम करती है। इसके प्रमुख प्रतिस्पर्धियों में लार्सन एंड टुब्रो (Larsen & Toubro), टाटा प्रोजेक्ट्स (Tata Projects), हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (Hindustan Construction Company), और दिलीप बिल्डकॉन (Dilip Buildcon) जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

निवेशकों की नज़र अब कंपनी द्वारा नए कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर की नियुक्ति पर रहेगी। वे यह भी ट्रैक करेंगे कि कंपनी अपने चल रहे रेगुलेटरी और फाइनेंशियल रीस्ट्रक्चरिंग प्रयासों को कितनी प्रभावी ढंग से संभालती है, साथ ही इसके ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और वित्तीय सेहत पर किसी भी नए अपडेट पर भी नजर रखी जाएगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.