SM Auto Stamping Ltd ने डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के साथ अपने एक पुराने कंप्लायंस (compliance) मुद्दे का सफलतापूर्वक निपटारा कर लिया है। कंपनी ने दो एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (EPCG) ऑथोराइजेशन (Authorizations) को सरेंडर कर दिया है, जिनका कंपनी ने उपयोग नहीं किया था।
पुणे स्थित असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने इन लाइसेंसों के सरेंडर को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही, DGFT द्वारा जारी किए गए संबंधित शो कॉज नोटिस (Show Cause Notices - SCNs) को भी सफलतापूर्वक बंद कर दिया गया है।
कंपनी ने साफ किया है कि इस पूरे मामले का उस पर कोई भी मौद्रिक असर (monetary impact) नहीं होगा। इसका सीधा मतलब है कि कंपनी को किसी भी तरह की कस्टम ड्यूटी (custom duty) या ब्याज का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
यह मामला एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (EPCG) स्कीम से जुड़ा था। इस स्कीम के तहत, कंपनियों को कैपिटल गुड्स (capital goods) इम्पोर्ट करने पर कस्टम ड्यूटी में छूट मिलती है, बशर्ते वे एक निश्चित अवधि में एक्सपोर्ट का लक्ष्य पूरा करें। SM Auto Stamping ने दो ऐसे लाइसेंस लिए थे, लेकिन उन्हें इस्तेमाल न कर पाने के कारण यह स्थिति बनी।
इस डेवलपमेंट से SM Auto Stamping ने नियामक (regulatory) आवश्यकताओं के प्रति अपनी सक्रियता दिखाई है। पुराने लाइसेंसों को सरेंडर करके और नोटिसों को बंद करवाकर, कंपनी ने भविष्य के लिए अपनी स्थिति को स्पष्ट किया है।
कंपनी की बात करें तो, SM Auto Stamping ने 31 मार्च 2025 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर (financial year) में ₹68.3 करोड़ का रेवेन्यू (revenue) दर्ज किया था। कंपनी में 127 कर्मचारी कार्यरत हैं।
हालांकि, निवेशक कंपनी के भविष्य के कंप्लायंस (compliance) पर नजर रखेंगे। हाल ही में कंपनी के कंपनी सेक्रेटरी (Company Secretary) और कंप्लायंस ऑफिसर (Compliance Officer) का इस्तीफा भी एक अहम बात है, जिसे करियर कारणों से बताया गया है।
ऑटो कॉम्पोनेंट सेक्टर में Pricol Ltd, Minda Corporation Ltd, और LGB Forge Ltd जैसी कंपनियां भी इसी तरह के नियामक ढांचे में काम करती हैं।
