SKF India Industrial Limited ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने नतीजे पेश कर दिए हैं। कंपनी ने ₹963.20 करोड़ का कुल रेवेन्यू दर्ज किया है, जबकि मुनाफा ₹118.97 करोड़ रहा।
यह नतीजे कुछ महत्वपूर्ण वजहों से पिछले सालों के नतीजों से सीधे तुलना करने लायक नहीं हैं। दरअसल, कंपनी को ₹200.41 करोड़ के भारी-भरकम खर्च डी-मर्जर (Demerger) यानी कंपनी के इंडस्ट्रियल बिजनेस को अलग करने की प्रक्रिया और नए लेबर कोड (Labor Codes) लागू होने से जुड़े वैधानिक समायोजनों (statutory impacts) के कारण उठाने पड़े हैं।
गौरतलब है कि SKF India Limited का इंडस्ट्रियल बिजनेस 1 अक्टूबर 2025 से एक अलग एंटिटी SKF India (Industrial) Limited के रूप में काम कर रहा है, और ये इसी डी-मर्जर के बाद जारी किए गए पहले नतीजे हैं।
इन नतीजों के साथ, कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन ₹10 प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड (Final Dividend) की सिफारिश की है। इस डिविडेंड को आगामी एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में पेश किया जाएगा।
कंपनी ने यह भी आगाह किया है कि नए लेबर कोड के नियमों के अंतिम रूप लेने के बाद कर्मचारी लाभ देनदारियों (employee benefit liabilities) में और भी समायोजन (adjustments) की संभावना है।
