SIS Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं, जिसमें कुल रेवेन्यू ₹4,489 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। कंपनी का EBITDA भी ₹207 करोड़ रहा, जो इसके मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को दिखाता है।
कंपनी के भारत स्थित सिक्योरिटी सेगमेंट (India Security segment) में जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिली, जिसका रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 34.2% बढ़कर ₹1,925 करोड़ हो गया। वहीं, इंटरनेशनल सिक्योरिटी सेगमेंट (International Security segment) ने भी 36.9% का इजाफा दिखाते हुए ₹1,950 करोड़ का रेवेन्यू जेनरेट किया। इन नतीजों से कंपनी का रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) सुधरकर 16.5% (पिछले साल 14.3% था) हो गया और डेज सेल्स आउटस्टैंडिंग (DSO) घटकर 63 दिन पर आ गया। इसके अलावा, नए लेबर कोड (Labour Codes) के लागू होने से जुड़े ₹38.8 करोड़ की एक एक्सेप्शनल लायबिलिटी के रिवर्सल ने भी तिमाही नतीजों को बेहतर बनाने में मदद की।
SIS अपनी '15 से 15' स्ट्रैटेजी पर लगातार काम कर रही है, जिसका लक्ष्य लगातार डबल-डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ और रिटर्न्स हासिल करना है। इसी के तहत, कंपनी ने जनवरी 2024 में यूके (UK) में V3 Services का अधिग्रहण कर अपनी इंटरनेशनल मौजूदगी को और मजबूत किया है।
हालांकि, शानदार नतीजों के बावजूद, SIS ने अपने कैश लॉजिस्टिक्स बिजनेस के नियोजित IPO को फिलहाल टाल दिया है। इसके पीछे भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical issues) और बाजार की अनिश्चितता को मुख्य वजह बताया गया है। इसके अलावा, आने वाले लेबर कोड्स (Labour Codes) के इंटीग्रेशन में भी कुछ जटिलताएं और संभावित लागत बढ़ने की आशंका है। इंडस्ट्री में 42% के हाई एट्रिशन रेट (attrition rate) को भी एक बड़ा ऑपरेशनल चैलेंज माना जा रहा है।
आगे चलकर, SIS मैनेजमेंट अपने हालिया अधिग्रहणों का फायदा उठाने, भारत में अपनी मार्केट पोजीशन मजबूत करने और लेबर कोड में बदलावों के प्रभाव को मैनेज करने पर फोकस करेगा। कैश बिजनेस के IPO के लिए कोई नई समय-सीमा फिलहाल तय नहीं है।
SIS का डाइवर्सिफाइड सिक्योरिटी और बिजनेस सपोर्ट सर्विसेज मॉडल इसे Quess Corp (जो कई तरह की सेवाएं देती है) और TeamLease Services (जो स्टाफिंग में है) जैसे प्रतिस्पर्धियों से अलग करता है। इसके कैश आर्म के सेगमेंट में CMS Info Systems जैसे प्लेयर्स भी मौजूद हैं।
निवेशकों को अगले कुछ सालों में '15 से 15' स्ट्रैटेजी के वास्तविक नतीजे देखने होंगे। मैनेजमेंट की APS मार्जिन को SIS इंडिया के स्तर तक 12–18 महीनों में इंटीग्रेट करने की क्षमता, कैश बिजनेस IPO से जुड़ी डेवलपमेंट, लेबर कोड की लागत और एट्रिशन मैनेजमेंट, और भारत में मार्केट शेयर बढ़ाने पर भी नजर रहेगी। इंटरनेशनल मार्केट्स में हाई-मार्जिन सीजनल इवेंट कॉन्ट्रैक्ट्स का प्रदर्शन भी अहम होगा।
