SIS Limited ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए अपने नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की कंसोलिडेटेड टोटल इनकम (consolidated total income) सालाना आधार पर 20.92% बढ़कर ₹16,030.07 करोड़ पर पहुंच गई। पूरे फाइनेंशियल ईयर (financial year) का नेट प्रॉफिट (net profit) ₹137.81 करोड़ रहा।
चौथी तिमाही (Q4 FY26) में कंपनी ने कमाल का प्रदर्शन किया। इस तिमाही में कंसोलिडेटेड टोटल इनकम 30.67% बढ़कर ₹4,500.97 करोड़ हो गई। सबसे अहम बात, Q4 FY26 में कंपनी ₹102.50 करोड़ के मुनाफे में आ गई, जबकि पिछले साल की समान तिमाही (Q4 FY25) में ₹223.35 करोड़ का भारी घाटा था।
हालांकि, इन शानदार नतीजों पर एक बड़े असाधारण खर्च (exceptional expense) का असर साफ दिख रहा है। नए लेबर कोड (Labour Codes) लागू होने के बाद कर्मचारियों को बढ़े हुए लाभ (employee benefits) देने के कारण कंपनी को ₹290.02 करोड़ का एकमुश्त भुगतान करना पड़ा। इस बड़े खर्च ने साल भर के मुनाफे को काफी कम कर दिया।
कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि रेवेन्यू में लगातार ग्रोथ इस बात का संकेत है कि SIS का मार्केट में दबदबा बढ़ रहा है। Q4 में प्रॉफिट में वापसी परिचालन (operations) में सुधार और मांग बढ़ने की ओर इशारा करती है।
हालांकि, सबसे बड़ा कंसर्न (concern) यह ₹290.02 करोड़ का खर्च है। निवेशकों को यह देखना होगा कि SIS भविष्य में इन बढ़े हुए कर्मचारी लागतों (employee costs) को कैसे मैनेज करती है। कंपनी पर कुल ₹1,435.35 करोड़ का डेट (debt) भी है, जिसमें ₹897.09 करोड़ लॉन्ग-टर्म और ₹538.26 करोड़ करंट बोरिंग्स (current borrowings) शामिल हैं। डेट मैनेजमेंट (debt management) कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ के लिए काफी अहम होगा।
