SFAL ने 3,62,500 शेयर बेचे, जो Nilachal Refractories के 1.78% वोटिंग कैपिटल के बराबर हैं। इस ऑफ-मार्केट डील के बाद, SFAL अब Nilachal Refractories में एक भी शेयर नहीं रखती है, यानी कंपनी ने पूरी तरह से अपनी हिस्सेदारी बेच दी है।
सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि इस ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट की गई तारीख 22 अप्रैल 2026 है, जबकि सिग्नेटरी डेट 24 अप्रैल 2026 बताई गई है। ये दोनों तारीखें भविष्य की हैं, जिससे असली ट्रांजैक्शन की टाइमलाइन और रिपोर्टिंग की सटीकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह बिक्री इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल ही में SFAL ने Nilachal Refractories में कंट्रोलिंग स्टेक (controlling stake) हासिल करने और इसे स्टॉक एक्सचेंजों से डीलिस्ट (delist) करने की योजना बनाई थी। भविष्य की रिपोर्टिंग डेट्स को लेकर यह गड़बड़ी प्रोसीजरल अनुपालन (procedural adherence) और समय पर डिस्क्लोजर (timely disclosure) पर सवाल उठाती है, जो निवेशकों का भरोसा डगमगा सकती है।
Nilachal Refractories, जिसकी स्थापना 1977 में हुई थी, भारी उद्योगों के लिए रिफ्रैक्टरी प्रोडक्ट्स बनाती है। कंपनी का इतिहास वित्तीय संकटों से भरा रहा है, जिसमें बीते वर्षों में नेट लॉस (net loss) और 'सिक कंपनी' (sick company) घोषित होना भी शामिल है। वहीं, SFAL Speciality Alloys Limited, जिसकी शुरुआत मार्च 2023 में हुई थी, Nilachal Refractories में सक्रिय रही है। SFAL ने 22 अप्रैल 2026 को 51.52% का कंट्रोलिंग स्टेक हासिल किया था, जिसका मकसद Nilachal Refractories को डीलिस्ट करना था।
सबसे बड़ा तात्कालिक जोखिम ट्रांजैक्शन और सिग्नेटरी डेट्स का भविष्य में होना है। दोनों कंपनियों से इस मामले में स्पष्टीकरण की ज़रूरत होगी। इसके अलावा, Nilachal Refractories अपनी वित्तीय सेहत से जुड़े जोखिमों का सामना कर रही है, जैसे कि पिछला नेट लॉस, बिक्री में धीमी ग्रोथ और लो इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो (low interest coverage ratio)।
31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के लिए, Nilachal Refractories ने ₹15.82 मिलियन की स्टैंडअलोन बिक्री पर ₹48.53 मिलियन का स्टैंडअलोन नेट लॉस दर्ज किया।
निवेशकों की नज़र अब SFAL और Nilachal Refractories से भविष्य की तारीखों पर स्पष्टीकरण पर रहेगी। यह जानना भी ज़रूरी होगा कि SFAL से यह 1.78% स्टेक किसने खरीदा। इसके अलावा, Nilachal Refractories की डीलिस्टिंग प्रक्रिया और अल्पसंख्यकों पर इसके असर पर भी नज़र रखी जाएगी।
