कोर्ट का आदेश: सैलरी और बैंक रिकवरी पर अहम निर्देश
मद्रास हाई कोर्ट ने 30 अप्रैल, 2026 को (ऑर्डर 5 मई, 2026 को अपलोड हुआ) अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत SEPC Limited को ₹2 करोड़ की रकम विशेष रूप से अपनी कर्मचारियों की सैलरी चुकाने के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है। कोर्ट ने कंपनी के रिज़ॉल्यूशन प्लान (resolution plan) के तहत बकाया रकम की वसूली के लिए बैंकों के कंसोर्टियम (consortium of banks) को SEPC के ट्रस्ट एंड रिटेंशन अकाउंट से ₹15.69 करोड़ तक की राशि लेने की इजाजत भी दे दी है।
Twarit Consultancy पर दबाव: ₹2.5 करोड़ जमा करने की डेडलाइन
इसके साथ ही, Twarit Consultancy Services Pvt. Limited पर ₹2.5 करोड़ कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास ऑर्डर की तारीख से 15 दिनों के अंदर जमा करने का दबाव है। कंपनी को अपने तिमाही भुगतान ₹7.5 करोड़ के लिए फंड सोर्स (fund sources) का खुलासा भी करना होगा।
SEPC का क्या है कहना? कोई सीधा फाइनेंशियल इंपैक्ट नहीं
SEPC Limited ने कहा है कि इन अंतरिम उपायों का कंपनी पर कोई सीधा, मापने योग्य फाइनेंशियल इंपैक्ट (financial impact) पड़ने की उम्मीद नहीं है। इसका मुख्य कारण एक मौजूदा इंडेम्निफिकेशन एग्रीमेंट (indemnification agreement) है। कंपनी को 29 अप्रैल, 2026 तक ₹7.14 करोड़ के ट्रेड रिसीवेबल्स (trade receivables) प्राप्त हुए थे, जबकि पहले ₹154.00 करोड़ के रिसीवेबल्स अटैच किए गए थे।
SEPC की पिछली चुनौतियां और अदालती मामले
SEPC Limited, जिसे पहले श्रीराम ईपीसी (Shriram EPC) के नाम से जाना जाता था, वित्तीय कठिनाइयों से गुजर रही है। मार्च 2022 में इसका रिज़ॉल्यूशन प्लान अप्रूव हुआ था। कंपनी सिंगापुर आर्बिट्रेशन (Singapore arbitration) के लगभग ₹195 करोड़ प्लस इंटरेस्ट (interest) के अवार्ड (award) को लेकर लंबे कानूनी विवादों में फंसी रही है। यह अवार्ड हल्दिया कोक एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड (Haldia Coke and Chemicals Pvt Ltd) के शेयर खरीद समझौते से जुड़ा था। फरवरी 2026 में, मद्रास हाई कोर्ट ने SEPC के ₹154.63 करोड़ के ट्रेड रिसीवेबल्स को अटैच करने का आदेश दिया था और कंपनी के फाइनेंस का ऑडिट करने के लिए प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (PWC) को नियुक्त किया था। कंपनी के नेगेटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो (operating cash flow) और अस्थिर मार्जिन (volatile margins) को लेकर भी चिंताएं जताई गई थीं।
आगे क्या होगा?
कोर्ट द्वारा ₹2 करोड़ सैलरी के लिए आवंटित करने से SEPC आवश्यक कर्मचारी भुगतान जारी रख पाएगी। बैंकों का ₹15.69 करोड़ का एक्सेस रिज़ॉल्यूशन प्लान के तहत बकाया वसूली की ओर एक कदम है, हालांकि यह अकाउंट बैलेंस पर निर्भर करता है। Twarit Consultancy Services पर फंड जमा करने और डिस्क्लोजर देने का तत्काल दायित्व है, जिसे पूरा न करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। सबसे बड़ा जोखिम यह है कि Twarit Consultancy Services ₹2.5 करोड़ जमा करने और फंड सोर्स बताने की समय सीमा चूक जाए। आगे, 23 जून, 2026 को अगली कोर्ट हियरिंग (court hearing) पर सबकी नज़र रहेगी, जहां आगे के न्यायिक फैसले आएंगे।
